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झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्टः राज्य विकास पथ पर अग्रसर, प्रति व्यक्ति आय भी सवा लाख पार

राज्य तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है. साथ ही प्रति व्यक्ति आय भी सवाल लाख रुपये के पार हो गयी है. पांच साल के दौरान गरीबी में 13.29 प्रतिशत कमी हुई है.
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Ranchi : राज्य तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है. साथ ही प्रति व्यक्ति आय भी सवाल लाख रुपये के पार हो गयी है. पांच साल के दौरान गरीबी में 13.29 प्रतिशत कमी हुई है. मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की गयी है. 

 

सेवा के क्षेत्र ने उद्योगों को पीछे छोड़ा दिया है. लेकिन राज्य की अर्थ व्यवस्था में कृषि के योगदान में गिरावट दर्ज की गयी है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट (2025-26) में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.

 

सरकार की ओर से पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले 13 साल में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में तीन गुना की वृद्धि हुई है. वर्ष 2011-12 में राज्य का GSDP 1,50,918 करोड़ रुपये था. 2024-25 में यह बढ़ कर 3,03,178 करोड़ रुपये हो गया है.

 

2025-26 में इसके 5.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है. राज्य के विकास दर के देखते हुए अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 में GSDP के 6.1 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद जतायी गयी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य का विकास दर पिछले चार साल से लगातार सात प्रतिशत से अधिक रहा है.

 

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया कि मुद्रास्फीति में दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है. वर्ष 2023-24 में मुद्रास्फीति छह प्रतिशत थी. 2024-25 में यह गिरकर चार प्रतिशत तक पहुंच गयी है. रिपोर्ट में प्रति व्यक्ति आय एक लाख रुपये के पार होने का उल्लेख किया गया है.

 

प्रति व्यक्ति आय की चर्चा करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि वर्तमान मूल्य पर 2016-17 में राज्य में प्रति व्यक्ति आय 60 हजार रुपये थी. 2024-25 में यह बढ़ कर 1,16,663 रुपये हो गयी थी.

 

2025-26 में इसे और बढ़ कर 1.25 लाख रुपये होने का अनुमान किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के जीएसडीपी में वृद्धि को देखते हुए प्रति व्यक्ति आय के 1.35 लाख रुपये होने की उम्मीद है.

 

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में राज्य की आर्थिक गतिविधियों में हए बदलाव का उल्लेख करते हुए यह कहा गया है कि सेवा के क्षेत्र ने उद्योग के क्षेत्र को पीछे छोड़ दिया है. वर्ष 2011-12 में सेवा के क्षेत्र का Gross state value adition (GSVA) 38.5 प्रतिशत था.

 

2024-25 में यह बढ़ कर 45.56 प्रतिशत हो गया है. 2025-26 में सेवा के क्षेत्र का GSVA, 1.37 लाख करोड़ रुपये और 2026-27 में इसके 1.48 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान किया गया है. 

 

उद्योगों के भीतर निर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी भी 47.7 प्रतिशत से बढ़ कर 55.4 प्रतिशत हो गयी है. हालांकि आर्थिक क्षेत्र में कृषि के योगदान में कमी हुई है. कृषि की हिस्सेदारी 9.65 प्रतिशत से गिर कर छह प्रतिशत तक पहुंच गयी है. हालांकि कृषि उत्पादन में वृद्धि जारी रहने की बात कही गयी है.

 

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में राज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान गरीबी में 13.29 प्रतिशत की कमी होने की उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2015-16 में राज्य में गरीबी 42.10 प्रतिशत थी. 2019-21 में गरीबी 28.81 प्रतिशत रही. राज्य में गरीबी में आयी यह कमी राष्ट्रीय औसत से बेहतर है. 

 

रिपोर्ट में राज्य बजट और आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि राज्य गठन के बाद से 2024-25 तकी अवधि में बजट आकार में करीब 20 गुना की वृद्धि हुई है.

 

वित्तीय वर्ष 2001-02 में राज्य का बजट 6067 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़ कर 1.16 लाख करोड़ रुपये हो गया. रिपोर्ट में राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार और राज्य के अपने राजस्व स्रोतो की औसत वृद्धि दर 14.2 प्रतिशत होने का उल्लेख किया गया है.

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