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जयराम रमेश ने कहा, कांग्रेस के बिना मजबूत विपक्षी फ्रंट की बात बेमानी, बोलने नहीं मिलेगा, तो डेमोक्रेसी कैसे बचेगी?

 NewDelhi : कांग्रेस के बिना कोई भी मजबूत अपोजिशन फ्रंट नहीं बन सकता आप कितने भी फ्रंट बना लीजिए, उनमें कांग्रेस का होना जरूरी है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक इंटरव्यू में यह बात कही.जयराम रमेश ने संसद में कांग्रेस के मुद्दों और तृणमूल-समाजवादी पार्टी के थर्ड फ्रंट को लेकर अपनी राय भी रखी. संसदीय कार्यवाही को लेकर जयराम ने कहा कि संसद में विपक्ष को बोलने की इजाजत होनी चाहिए. यह लोकतंत्र की बुनियाद है. आरोप लगाया कि हमें बोलने ही नहीं दिया जाता है. वे न्यूज एजेंसी PTI को दिये गये इंटरव्यू में बोल रहे थे. इसे भी पढ़ें : कानून">https://lagatar.in/sanjay-raut-lashed-out-at-law-minister-rijiju-said-his-statements-are-an-attempt-to-threaten-judges/">कानून

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TMC, समाजवादी फ्रंट कोई बड़ी बात नहीं है

जयराम ने कहा कि TMC, समाजवादी फ्रंट कोई बड़ी बात नहीं है. लोग मिलते रहते हैं, फ्रंट बनते रहते हैं. थर्ड फ्रंट, फोर्थ फ्रंट, फिफ्थ फ्रंट बनता रहेगा पर विपक्ष में कांग्रेस का होना जरूरी है. कहा कि अगर विपक्ष का संगठन बनता है तो उसमें कांग्रेस की भूमिका अहम होगी.. कांग्रेस के बिना कोई अपोजिशन फ्रंट संभव ही नहीं है. जयराम रमेश ने कहा कि 2024 के चुनावों के लिए अभी से फ्रंट बनाना जल्दीबाजी है.. अभी कर्नाटक में चुनाव हैं, फिर तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम में चुनाव होंगे.. 2023 में हम राज्यों के चुनाव में व्यस्त रहेंगे.. 2024 के बारे में बाद में देखेंगे.. अभी तो बैठकें होती रहेंगी.. इसे भी पढ़ें :  भारत">https://lagatar.in/police-reached-rahul-gandhis-residence-to-get-information-about-the-victims-of-sexual-abuse-in/">भारत

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संसदीय लोकतंत्र का पहला नियम है कि विपक्ष अपना मत रखेगा

रमेश ने कहा कि अगर अपोजिशन को बोलने ही नहीं दिया जाएगा तो डेमोक्रेसी कैसे बचेगी? अगर कम अवधि की बैठकें नहीं होंगी, अगर मोशन अडजर्नमेंट का नोटिस देने की इजाजत नहीं होगी, अगर हमें अडानी मुद्दे पर, चीन पर, आर्थिक मुद्दों पर चर्चा नहीं करने दी जायेगी तो यह कैसी डेमोक्रेसी हैं? कहा कि संसदीय लोकतंत्र का पहला नियम होता है कि विपक्ष अपना मत रखेगा और सत्ता पक्ष अपने हिसाब से काम करेगा.. हम ये अच्छी तरह जानते हैं कि हमारे पास सदन में बहुत कम सांसद हैं, लेकिन हमें परेशानी इस बात की है कि सरकार हमें हमारी बात कहने भी नहीं देती. [wpse_comments_template]

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