Ranchi News: झारखंड राज्य जल सहिया कर्मचारी संघ के बैनर तले राज्यभर की जल सहियाएं अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर विधानसभा के कुटे मैदान में एकजुट हो गये हैं. सभी अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हैं. इसके बाद मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा गया. इस दौरान जल सहियाओं ने कहा कि लंबे समय से मानदेय और विभिन्न प्रोत्साहन राशियों का भुगतान लंबित है, इसके वजह से जल सहियाओं को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
जलसहियाओं ने कहा कि लंबित मानदेय के भुगतान के लिए सभी जिलों में राशि उपलब्ध कराई गई थी. कुछ जिलों में केवल 50 प्रतिशत दी गई, जबकि कुछ जिलों में 30 प्रतिशत जल सहियाओं को ही भुगतान किया गया. बोकारो जिले में भी करीब 30 प्रतिशत जल सहियाओं का भुगतान नहीं होने की बात कही. मार्च क्लोजिंग का हवाला देकर राशि वापस कर दी गई, जबकि भुगतान के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध था.
कई वर्षों की प्रोत्साहन राशि बकाया
जल सहिया संघ ने दावा किया है कि वर्ष 2022 में अप्रैल से अगस्त तक पांच महीने और वर्ष 2024 में अप्रैल से अगस्त तक पांच महीने की प्रोत्साहन राशि बकाया है. इसके अलावा शौचालय निर्माण और जल जांच से संबंधित प्रोत्साहन राशि का भी भुगतान नहीं होने की बात कही.
जल सहियाओं ने कहा कि चुनाव के समय सरकार के साथ हुई वार्ता के बाद जल सहियाओं के लिए 2 हजार रुपए मासिक मानदेय लागू किया गया था. लेकिन मार्च 2026 से सितंबर 2026 तक का मानदेय भी बकाया है. जल सहियाओं ने कहा कि ऑनलाइन काम के लिए सरकार की ओर से मोबाइल उपलब्ध कराया गया है, लेकिन मोबाइल रिचार्ज की व्यवस्था नहीं की गई. 2 हजार रुपए के मासिक मानदेय में से करीब 350 रुपए हर महीने मोबाइल रिचार्ज पर खर्च हो जाते हैं.
संघ की पांच मांगें
- जल सहियाओं के लिए स्थायी नीति बनाकर उन्हें स्थायी किया जाए.
- जल सहियाओं को आयुष्मान बीमा योजना से जोड़ा जाए और अनुकंपा का लाभ दिया जाए.
- शहरी क्षेत्र में कार्यरत जल सहियाओं को नगर निगम में काम दिया जाए.
- वर्ष 2013 से 2026 तक चापाकल मरम्मत की बकाया प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाए.

