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जमशेदपुर: विकास दुबे की हत्या के पहले रेलवे पार्किंग में बिछी थी बिसात

 
Jamshedpur (Ashok kumar) : टाटानगर रेलवे स्टेशन के पार्किंग एरिया में बुधवार की रात के 1.45 बजे विकास दुबे की हत्या हुई थी. हत्या के पहले पार्किंग स्टैंड में ही बिसात बिछी हुई थी. बिसात में 5-6 लोग शामिल थे. बिसात के दौरान ही आपस में खाने-पीने का दौर चल रहा था और बक-झक हुई थी. विवाद इतना बढ़ गया कि सभी ने मिलकर विकास दुबे की पिटायी कर दी. पिटायी की घटना में रॉड और धारदार हथियार का उपयोग किये जाने की आशंका है. विकास के सिर पर गंभीर चोटें आयी है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-youth-murdered-in-tatanagar-station-parking-entire-incident-caught-on-cctv-camera/">जमशेदपुर

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घंटे भर से ज्यादा समय तक तड़पता रहा विकास

विकास की जब हालत पूरी तरह से नाजुक हो गयी तब वह ई बाइक सेंटर के पास बीच सड़क पर जाकर गिर पड़ा. इसके बाद वह घंटे भर से भी ज्यादा समय तक तड़पता रहा. टेंपो चालकों ने भी खुद के फंसने के भय से विकास की सुधि नहीं ली, लेकिन टेंपो चालकों ने रेल पुलिस और आरपीएफ की भी पोल खोलकर रख दी है. सूचना मिलने के बाद भी तत्काल पुलिस नहीं पहुंची. पुलिस अपना तर्क दे रही है कि पहले रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया था उसके बाद एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया गया था. यहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. [caption id="attachment_371813" align="aligncenter" width="601"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/vik-2.jpg"

alt="" width="601" height="400" /> जेब से बरामद विकास दुबे का आधार कार्ड.[/caption]

उपेंद्र सिंह के समय से ही बिछती रही है पार्किंग में बिसात

टाटानगर स्टेशन के पार्किंग स्टैंड में तब से ही बिसात बिछ रही है जब उपेंद्र सिंह पार्किंग का संचालन किया करते थे. उपेंद्र सिंह के पहले अजय सिंह को पार्किंग का ठेका मिला था. तब भी यह मामला सामने आया था. सूत्रों का कहना है कि पार्किंग में सिर्फ बिसात ही नहीं बिछती है बल्कि यहीं पर ही पॉकेटमार और रेल के झपटमारों की भी शरणस्थली है.

आरपीएफ-जीआरपी साधे रहती है चुप्पी

सबकुछ जानने के बाद भी आरपीएफ और जीआरपी चुप्पी साधे हुये रहती है क्योंकि उन्हें यहां से बराबर नजराना मिल जाया करता है. पार्किंग से संबंधित किसी तरह की भी शिकायतें रेल थाना या आरपीएफ तक पहुंचने पर उनकी ओर से मुंह फेर लिया जाता है.

2000 के दशक में चलता था हब्बा-डब्बा

2000 के दशक की बात करें तो यहां पर हब्बा-डब्बा का खेल इन गेट पर ही हुआ करता था. उस समय यहां का स्टैंड साइकिल स्टैंड के नाम पर था. अखबारों में सुर्खियों में खबर छपने के बाद इस खेल को जिला पुलिस की ओर से ही बंद करवाया गया था. तब यहां से रोजाना धंधेबाजों को अच्छी खासी कमायी होती थी. इसका संचालन करने वाले लोगों की पहुंच भी उंची होती है. इसे भी पढ़ें : पोटका">https://lagatar.in/potka-entering-the-house-on-pretext-of-asking-for-water-in-kalikapur-robbing-the-chain-from-the-neck-of-the-woman/">पोटका

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