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Jamshedpur : उपायुक्त ने स्कूली बच्चों को कृमि मुक्ति दवा खिलाकर किया अभियान का शुभारंभ

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का मुख्य उद्देश्य एक से 19 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों एवं किशोरों को कृमि संक्रमण से मुक्त कराना है. कृमि संक्रमण बच्चों में कुपोषण, खून की कमी, मानसिक एवं शारीरिक विकास में बाधा और शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है.
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राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस समारोह में बच्चों को संबोधित करते उपायुक्त.

Vishwajeet Bhatt

Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का विधिवत शुभारंभ मंगलवार को उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने साकची हाई स्कूल, जमशेदपुर में बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा खिलाकर की. मौके पर सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल, डीआरसीएचओ डॉ रंजीत पांडा एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे. साथ ही विद्यालय के छात्र-छात्राओं के बीच स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश प्रसारित किया गया. मंगलवार को सभी शिक्षण संस्थानों में दवा खिलाई गई. 19 सितंबर को 'मॉप-अप राउंड' चलाया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा छूट न जाए. 

बच्चों एवं किशोरों को कृमि संक्रमण से मुक्त कराना उद्देश्य

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का मुख्य उद्देश्य एक से 19 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों एवं किशोरों को कृमि संक्रमण से मुक्त कराना है. कृमि संक्रमण बच्चों में कुपोषण, खून की कमी, मानसिक एवं शारीरिक विकास में बाधा और शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. उपायुक्त ने प्रत्येक विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और समुदायों में प्रत्येक योग्य बच्चे एवं किशोरों को दवा खिलाने का निर्देश स्वास्थ्य विभाग की टीम को दिया है. उन्होने कहा कि एएनएम, आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका एवं आशा कार्यकर्ता इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें.  अभिभावकों को जागरूक करें कि वर्ष में दो बार नियमित रूप से कृमिनाशक दवा दिलवाएं. इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रत्येक बच्चा दवा ले, ताकि कृमि संक्रमण को जड़ से समाप्त किया जा सके.

शिक्षा व पोषण तभी सार्थक, जब बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ

उपायुक्त ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि अपने बच्चों को कृमि नाशक दवा खिलायें. शिक्षा और पोषण तभी सार्थक होंगे जब बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेंगे. राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के माध्यम से हम अपने आने वाले भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक कदम उठा रहे हैं. हमारा लक्ष्य है कि जिले का कोई भी बच्चा कृमि संक्रमण से पीड़ित न रहे. 

साल में दो बार दवा जरूर लें बच्चे

सिविल सर्जन ने कहा कि कृमिनाशक दवा सुरक्षित है और हर बच्चे को साल में दो बार यह दवा लेनी चाहिए. स्वास्थ्य विभाग ने जिले के प्रत्येक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र तक दवा उपलब्ध कराई है. डॉ. रंजीत पांडा (जिला आरसीएच पदाधिकारी) ने कहा कि कृमि संक्रमण से लड़ने के लिए यह सामूहिक प्रयास है और यह तभी सफल होगा जब सभी बच्चे और अभिभावक सहयोग करेंगे. स्कूल या आंगनबाड़ी केन्द्र में दवा नहीं लेने वाले बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीमें घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी.

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