Jamshedpur (Sunil Pandey) : बकरीद पर्व को लेकर शहर में बकरा बाजार सज गया है. लगभग आधा दर्जन जगहों पर बकरा बेचा जा रहा है. लेकिन बकरा बिक्री का सबसे बड़ा बाजार साकची के आम बगान मैदान में लगा है. यहां झारखंड के रांची, तमाड़, चांडिल के अलावे यूपी तथा राजस्थान से भी बकरे बिक्री के लिए आए हैं. खासकर यूपी के इलाहाबाद, प्रयागराज, कौसाम्बी, भरवरी आदि जगहों से बकरे बिक्री के लिए आए हैं. बकरे के कारोबारी मो. खलील ने बताया कि महंगाई के कारण बकरों की बिक्री प्रभावित हुई है. परिवहन लागत ज्यादा होने के कारण बकरे के भाव ऊंचे आसमान पर हैं. उन्होंने बताया कि बकरीद का चांद दिखने (20 जून) के बाद से बकरा बजार सज जाता है. इस बार लगभग 100 बकरा वे बिक्री के लिए लाए हैं. उनके साथ दर्जनभर लोग भी साथ यहां आए हैं. जो बकरों को खिलाने,पिलाने एवं देखभाल का काम कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-two-day-national-executive-meeting-of-all-india-grahak-panchayat-in-tatanagar/">जमशेदपुर
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https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/md-khalil-300x200.jpg"
alt="" width="300" height="200" /> मो. खलील[/caption] मो.खलील ने बताया कि बकरीद में एक वर्ष से कम उम्र के बकरे अथवा बीमार बकरे की कुर्बानी नहीं दी जाती है. मान्यता के अनुसार कम से कम बकरे का दांत निकलना जरूरी होती है. एक वर्ष बाद ही किसी बकरे का दांत निकलता है. जिस बकरे का दांत नहीं निकलता है. उसे लोग पालने के लिए खरीद सकते हैं. ऐसे दर्जनभर बकरे यहां आए हैं. उन्होंने बताया कि बकरे की देखभाल के साथ-साथ खाने-पीने का सामान भी साथ में लेकर आना पड़ता है. हरे घांस एवं पेड़ों की पत्तियां यहां मिल जाती है. लेकिन चोकर, खल्ली, भूसा, कुट्टी वगैरह साथ में लाना पड़ता है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-rail-accident-in-bengal-canceled-many-trains-changed-the-route-of-many/">जमशेदपुर
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alt="" width="300" height="200" /> इलाहाबाद से बिक्री के लिए आया जमनालाल बकरा[/caption] आम बगान मैदान में लगे बकरा बाजार में “जमनालाल “ बकरा सभी के आकर्षण का केंद्र बना है. हर ग्राहक उसके पास जाता है. उसे सहलाता है. उसकी फोटो खींचता है, उसके साथ सेल्फी लेता है. जमनालाल काफी आज्ञाकारी है, मालिक का कहना मानता है. जबकि अन्य बकरे सामान्य हाल-भाव दर्शाते हैं. मो. खलील ने बताया कि ग्राहकों की पहली पसंद सफेद एवं ब्राउन रंग का बकरा है. काले रंग के बकरे को लोग कम पसंद कर रहे हैं. झारखंड के अधिकांश जगहों से काले बकरे बाजार में आए हैं. उनकी कीमत भी सफेद एवं ब्राउन रंग के बकरे से कम है. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-hearing-will-be-held-on-june-26-in-high-court-in-case-of-canceled-22-acres-land-of-forum-india/">आदित्यपुर
: फोरम इंडिया के रद्द 22 एकड़ जमीन मामले में हाई कोर्ट में 26 जून को होगी सुनवाई
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alt="" width="300" height="200" /> मो. असलम[/caption] मानगो के आजादबस्ती के रहने वाले मो. असलम ने बताया कि इस बार बकरीद पर्व पर महंगाई की मार पड़ी है. बकरे का दाम काफी महंगा हो गया है. जो बकरे 15 से 20 हजार में मिल जाते थे. इस बार उसका दाम 25 से 30 हजार रूपया हो गया है. उन्होंने बताया कि कुर्बानी देने के लिए वे बकरा खरीदने आए हैं. लेकिन महंगाई के कारण निराश हैं. हालांकि अपने बजट के हिसाब से वे कोई ने कोई बकरा जरूर खरीदेंगे. इसे भी पढ़ें : झारखंड">https://lagatar.in/golden-opportunity-for-the-youth-of-jharkhand-to-become-agniveer/">झारखंड
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alt="" width="300" height="200" /> मो. मुमताज[/caption] जमशेदपुर के भालुबासा निवासी मो. मुमताज ने बताया कि बकरीद पर्व नजदीक आ गया है. पर्व की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. कुर्बानी देने के लिए बकरा खरीदना है. लेकिन महंगाई के कारण इस बार छोटा बकरा ही खरीदकर कुर्बानी देंगे. इसे भी पढ़ें : चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-jmm-former-deputy-chief-minister-late-sudhir-mahtos-birth-anniversary-celebrated/">चाकुलिया
: झामुमो ने पूर्व उप मुख्यमंत्री स्व. सुधीर महतो की जयंती मनाई
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alt="" width="300" height="200" /> मो. फिरोज[/caption] मानगो आजादबस्ती के रहने वाले मो. फिरोज ने बताया कि बकरीद पर्व पर बकरे की कुर्बानी देने की प्रथा सदियों से चली आ रही है. जिसके कारण बकरा बाजार का विस्तार हुआ है. जमशेदपुर में पहले एक-दो जगहों पर बाजार लगता था. लेकिन इस बार मानगो, आजादबस्ती, आमबगान मैदान, धातकीडीह, जुगसलाई ईदगाह मैदान आदि जगहों पर बकरा बाजार लगता है. चांद दिखने के बाद से बाजार शुरू हो जाता है. आठ दिनों में बकरा बाजार में लाखों का कारोबार होता है. इसे भी पढ़ें : श्रावणी">https://lagatar.in/8650-police-personnel-will-be-deployed-in-shravani-mela-duty-police-headquarters-issued-order/">श्रावणी
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एक वर्ष से कम उम्र के बकरे की नहीं दी जाती है कुर्बानी- मो. खलील
[caption id="attachment_679307" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="200" /> मो. खलील[/caption] मो.खलील ने बताया कि बकरीद में एक वर्ष से कम उम्र के बकरे अथवा बीमार बकरे की कुर्बानी नहीं दी जाती है. मान्यता के अनुसार कम से कम बकरे का दांत निकलना जरूरी होती है. एक वर्ष बाद ही किसी बकरे का दांत निकलता है. जिस बकरे का दांत नहीं निकलता है. उसे लोग पालने के लिए खरीद सकते हैं. ऐसे दर्जनभर बकरे यहां आए हैं. उन्होंने बताया कि बकरे की देखभाल के साथ-साथ खाने-पीने का सामान भी साथ में लेकर आना पड़ता है. हरे घांस एवं पेड़ों की पत्तियां यहां मिल जाती है. लेकिन चोकर, खल्ली, भूसा, कुट्टी वगैरह साथ में लाना पड़ता है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-rail-accident-in-bengal-canceled-many-trains-changed-the-route-of-many/">जमशेदपुर
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जमनालाल बना आकर्षण का केंद्र
[caption id="attachment_679299" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="200" /> इलाहाबाद से बिक्री के लिए आया जमनालाल बकरा[/caption] आम बगान मैदान में लगे बकरा बाजार में “जमनालाल “ बकरा सभी के आकर्षण का केंद्र बना है. हर ग्राहक उसके पास जाता है. उसे सहलाता है. उसकी फोटो खींचता है, उसके साथ सेल्फी लेता है. जमनालाल काफी आज्ञाकारी है, मालिक का कहना मानता है. जबकि अन्य बकरे सामान्य हाल-भाव दर्शाते हैं. मो. खलील ने बताया कि ग्राहकों की पहली पसंद सफेद एवं ब्राउन रंग का बकरा है. काले रंग के बकरे को लोग कम पसंद कर रहे हैं. झारखंड के अधिकांश जगहों से काले बकरे बाजार में आए हैं. उनकी कीमत भी सफेद एवं ब्राउन रंग के बकरे से कम है. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-hearing-will-be-held-on-june-26-in-high-court-in-case-of-canceled-22-acres-land-of-forum-india/">आदित्यपुर
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बकरीद पर महंगाई की मार- मो. असलम
[caption id="attachment_679300" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="200" /> मो. असलम[/caption] मानगो के आजादबस्ती के रहने वाले मो. असलम ने बताया कि इस बार बकरीद पर्व पर महंगाई की मार पड़ी है. बकरे का दाम काफी महंगा हो गया है. जो बकरे 15 से 20 हजार में मिल जाते थे. इस बार उसका दाम 25 से 30 हजार रूपया हो गया है. उन्होंने बताया कि कुर्बानी देने के लिए वे बकरा खरीदने आए हैं. लेकिन महंगाई के कारण निराश हैं. हालांकि अपने बजट के हिसाब से वे कोई ने कोई बकरा जरूर खरीदेंगे. इसे भी पढ़ें : झारखंड">https://lagatar.in/golden-opportunity-for-the-youth-of-jharkhand-to-become-agniveer/">झारखंड
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बकरे के बगैर कुर्बानी बेकार- मो. मुमताज
[caption id="attachment_679301" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="200" /> मो. मुमताज[/caption] जमशेदपुर के भालुबासा निवासी मो. मुमताज ने बताया कि बकरीद पर्व नजदीक आ गया है. पर्व की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. कुर्बानी देने के लिए बकरा खरीदना है. लेकिन महंगाई के कारण इस बार छोटा बकरा ही खरीदकर कुर्बानी देंगे. इसे भी पढ़ें : चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-jmm-former-deputy-chief-minister-late-sudhir-mahtos-birth-anniversary-celebrated/">चाकुलिया
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बकरा बाजार में लाखों का होता है कारोबार- मो. फिरोज
[caption id="attachment_679303" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="200" /> मो. फिरोज[/caption] मानगो आजादबस्ती के रहने वाले मो. फिरोज ने बताया कि बकरीद पर्व पर बकरे की कुर्बानी देने की प्रथा सदियों से चली आ रही है. जिसके कारण बकरा बाजार का विस्तार हुआ है. जमशेदपुर में पहले एक-दो जगहों पर बाजार लगता था. लेकिन इस बार मानगो, आजादबस्ती, आमबगान मैदान, धातकीडीह, जुगसलाई ईदगाह मैदान आदि जगहों पर बकरा बाजार लगता है. चांद दिखने के बाद से बाजार शुरू हो जाता है. आठ दिनों में बकरा बाजार में लाखों का कारोबार होता है. इसे भी पढ़ें : श्रावणी">https://lagatar.in/8650-police-personnel-will-be-deployed-in-shravani-mela-duty-police-headquarters-issued-order/">श्रावणी
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