Jamshedpur (Anand Mishra) : कोल्हान विश्वविद्यालय हो या जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय या फिर झारखंड की अन्य स्टेट यूनिवर्सिटी में कमोबेश यही स्थिति है. विश्वविद्यालय हों या कॉलेज, अब से करीब 40 वर्ष पूर्व शिक्षकों अथवा कर्मचारियों के जो पद स्वीकृत हुए थे, अब तक वही चले आ रहे हैं. शिक्षकों व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के स्वीकृत पदों में कोई वृद्धि नहीं हुई. जबकि इतने वर्षों के दौरान छात्र संख्या में काफी वृद्धि हुई है. बताया तो यह जाता है कि इतने वर्षों के दौरान छात्र संख्या में करीब पांच से छह गुना अधिक वृद्धि हुई है. ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी संभव नहीं है.
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में कुल 12 दिन बैंक रहेंगे बंद, फटाफट निपटाये अपना काम 20 छात्र पर होने चाहिए एक शिक्षक
जानकार बताते हैं कि स्वीकृत पदों की तुलना में छात्रों की संख्या काफी अधिक है. प्रावधानों के मुताबिक कम से कम 20 छात्र पर एक शिक्षक होने चाहिए. लेकिन यहां स्थिति यह के कि ढाई-तीन सौ विद्यार्थियों पर एक शिक्षक हैं. इस वजह से पठन-पाठन की गुणवत्ता प्रभावित होती है.
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इसके अलावा शिक्षकेतर कर्मचारियों की संख्या भी काफी कम है. इस कारण भी विश्वविद्यालय समेत कॉलेजों में कामकाज और कक्षाएं प्रभावित होती हैं. शिक्षकेतर कर्मचारियों की कमी की वजह से कई ऐसे कार्य हैं, जिसे शिक्षकों को करना पड़ता है. इस वजह से शिक्षक नियमित रूप से कक्षाएं नहीं ले पाते हैं.
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कोल्हान विश्वविद्यालय के एक अंगीभूत कॉलेज के प्राचार्य ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अधिकांशतः प्रत्येक विभाग (विषय) में शिक्षकों को दो-दो स्वीकृत पद हैं. इन पदों का सृजन वर्षों पूर्व किया गया था. उसके बाद से छात्रों की संख्या बढ़ती गयी, लेकिन शिक्षकों के पदों की संख्या में वृद्धि नहीं की गयी. शिक्षक सेवानिवृत्त होते गये, लेकिन नियुक्ति नहीं हुई और न ही छात्र संख्या के अनुसार पदों का सृजन किया जा रहा है. घंटी आधारित संविदा शिक्षकों की सेवा ली जा रही है, तो वह भी स्वीकृत पदों के अनुसार ही उनकी वहाली की जा रही है. [wpse_comments_template]
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