Jamshedpur News: मानगो के गांधी घाट पर जितिया पर्व के दौरान शनिवार को बड़ा हादसा हो गया. पर्व को लेकर घाट पर हजारों की संख्या में महिलाएं पूजा और स्नान के लिए पहुंची थीं. इसी दौरान नदी में स्नान करने गईं दो बहनें तेज बहाव की चपेट में आकर डूबने लगीं. हादसे में ज्योति को मौके पर मौजूद एक कैंडी बेचने वाले ने अपनी जान जोखिम में डालकर नदी में छलांग लगाकर बचा लिया, जबकि उसकी बहन पूनम तेज बहाव में बह गई. देर शाम तक पूनम की तलाश जारी रही.
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घटना के बाद घाट पर अफरा-तफरी मच गई. लोगों ने पूनम की तलाश शुरू की और पुलिस-प्रशासन को घटना की सूचना दी गई. नदी में उसकी तलाश के लिए अभियान चलाया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उसका कोई पता नहीं चल सका. वहीं, नदी से बाहर निकाली गई ज्योति को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है.
हादसे के बाद घाट पर मौजूद लोगों ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए. लोगों का कहना है कि जितिया पर्व को लेकर गांधी घाट पर हजारों की संख्या में महिलाएं पहुंचने वाली थीं, इसके बावजूद घाट पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए. लोगों के अनुसार नदी के किनारे किसी तरह की बैरिकेडिंग या घेराव नहीं किया गया था. घाट पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं थी.
लोगों का आरोप है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान नदी में डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए गोताखोरों और आपदा राहत दल की टीम की तैनाती भी नहीं की गई. लोगों का सवाल है कि जब प्रशासन को पहले से पता था कि जितिया पर्व पर बड़ी संख्या में महिलाएं नदी घाटों पर पहुंचेंगी, तो गांधी घाट पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए.
लोगों का कहना है कि यदि घाट पर पहले से गोताखोर, आपदा राहत दल और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती रहती तो बचाव अभियान और अधिक तेजी से शुरू किया जा सकता था. फिलहाल पूनम की तलाश जारी है. हादसे के बाद घाट पर मौजूद लोगों में प्रशासन की व्यवस्था को लेकर नाराजगी है. लोगों ने भविष्य में ऐसे पर्वों के दौरान नदी घाटों पर बैरिकेडिंग, पर्याप्त रोशनी, पुलिस बल, गोताखोर और आपदा राहत टीम की अनिवार्य तैनाती की मांग की है.
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