Jamshedpur : टाटा स्टील में लंबे समय से लंबित ग्रेड रिवीजन को लेकर NS ग्रेड कर्मचारियों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है. कर्मचारियों और कई कमेटी मेंबर का आरोप है कि प्रस्तावित वेतन समझौते में NS ग्रेड कर्मचारियों के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है. इसी मुद्दे को लेकर यूनियन, कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच लगातार बैठक और चर्चाएं चल रही हैं.
कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी में करीब 10 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं. जिनमें लगभग 7 हजार NS ग्रेड के हैं. इसके बावजूद NS ग्रेड कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व केवल 84 कमेटी मेंबरों के माध्यम से होता है. जबकि करीब 3 हजार ओल्ड सीरीज कर्मचारियों के लिए 130 कमेटी मेंबर हैं. कर्मचारियों का आरोप है कि इस असंतुलन के कारण उनकी मांगों को उचित महत्व नहीं मिल पाता.
विवाद का मुख्य कारण MGB (मिनिमम गारंटीड बेनिफिट) और DA (महंगाई भत्ता) को लेकर है. कर्मचारियों का कहना है कि MGB को लगभग 9,400 रुपये तक सीमित रखने की तैयारी की जा रही है. जिससे 14 वर्ष का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों और नए कर्मचारियों के बीच लाभ का अंतर काफी कम हो जाएगा. वहीं, पिछले 15 वर्षों से DA का प्रति प्वाइंट मूल्य 3 रुपये ही बना हुआ है. कर्मचारी इसे बढ़ाकर 6 रुपये प्रति प्वाइंट करने की मांग कर रहे हैं.
सोमवार को यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी के साथ हुई बैठक में कर्मचारियों को कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला. इसके बाद NS ग्रेड के करीब 25 कमेटी मेंबर यूनियन महामंत्री सतीश सिंह के बिष्टुपुर स्थित आवास पहुंचे और अपनी मांगों को उनके सामने रखा. सूत्रों के अनुसार, महामंत्री ने कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सहयोग का भरोसा दिया है.
इधर, कुछ कमेटी मेंबर ने सामूहिक इस्तीफे के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी शुरू कर दिया है. इस पर यूनियन नेतृत्व ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि ऐसे कदम विभागीय कार्रवाई का कारण बन सकते हैं. मंगलवार को प्रबंधन भी सक्रिय हो गया और हस्ताक्षर अभियान में शामिल कुछ कमेटी मेंबर को HRM विभाग के अधिकारियों ने बातचीत के लिए बुलाया. अधिकारियों ने कर्मचारियों से औद्योगिक शांति बनाए रखने की अपील की और अनुशासनहीनता की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी भी दी.
ग्रेड रिवीजन को लेकर बढ़ती गतिविधियों के बीच अब कर्मचारियों की निगाहें आगामी वेतन समझौते पर टिकी हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रस्तावित समझौते में NS ग्रेड कर्मचारियों की मांगों और चिंताओं को कितना स्थान मिलता है.
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