Jamshedpur News : विधायक सरयू राय ने मानगो नगर निगम के वर्तमान अपर नगर आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव से कानूनी रूप से उचित कार्रवाई की मांग की है.
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सरयू राय ने करोड़ों रुपये की योजनाओं की निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है. उन्होंने पहले से आगे बढ़ चुकी निविदाओं को रद्द करने पर भी सवाल उठाया है.
उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल 2026 को छह योजनाओं की निविदा निकाली गई थी. इनकी कुल लागत 3 करोड़ 58 लाख 17 हजार 400 रुपये थी. निविदाएं खोली जा चुकी थीं और तुलनात्मक वित्तीय विवरणी भी तैयार हो चुकी थी.
इन योजनाओं को विभाग से प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल चुकी थी. इसके बावजूद वर्तमान अपर नगर आयुक्त ने निविदाओं का निष्पादन करने के बजाय उन्हें रद्द कर दिया. सरयू राय के अनुसार, इससे जरूरी योजनाओं का काम लंबित हो गया.
सरयू राय ने 27 सितंबर 2025 और 15 जनवरी 2026 की निविदाओं को रद्द किए जाने पर भी सवाल उठाया. इनमें 2 करोड़ 6 लाख 90 हजार 540 रुपये की 22 योजनाएं शामिल थीं. उन्होंने कहा कि इन निविदाओं को खोला जा चुका था. संवेदकों का चयन भी हो गया था. कार्यादेश के बाद अग्रधन भी जमा कराया गया था.
सरयू राय ने बताया कि चयनित संवेदकों ने काम शुरू नहीं किया. ऐसी स्थिति में नियमानुसार तीन सूचनाएं जारी करने के बाद कार्रवाई की जानी चाहिए थी. इसके बजाय निविदाएं ही रद्द कर दी गईं.
पुरानी दर-सूची पर 55 योजनाओं की निविदा
सरयू राय ने नई निर्धारित दर-सूची जारी होने के बाद पुरानी दर-सूची पर निविदा निकालने का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न कार्य विभागों के लिए नई निर्धारित दर-सूची जारी की है.
इसके बावजूद मानगो नगर निगम ने पुरानी दर-सूची के आधार पर 55 योजनाओं की निविदा प्रकाशित की. इनकी प्राक्कलित राशि 5 करोड़ 58 लाख 5 हजार 870 रुपये है. राय के अनुसार, नई दर-सूची जारी होने के बाद पुरानी दर-सूची पर निविदा निकालना उचित नहीं है.
योजनाओं के चयन में भेदभाव का आरोप
विधायक ने विकास योजनाओं के चयन में भी भेदभाव का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 के अनुसार नगर निगम की कार्यकारी शक्तियां निर्धारित अधिकारियों के पास हैं.
राय के अनुसार, इसके बावजूद मानगो नगर निगम के अपर नगर आयुक्त बाहरी दबाव में काम कर रहे हैं. उन्होंने विकास योजनाओं के चयन में भेदभाव किए जाने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि स्थानीय विधायक होने के नाते वह निगम बोर्ड के पदेन सदस्य हैं. इसके बावजूद 55 योजनाओं में उनके कार्यालय से भेजी गई एक भी योजना शामिल नहीं की गई. राय ने इसे राजनीतिक दबाव में किया जा रहा भेदभावपूर्ण आचरण बताया.
बोर्ड बैठक को लेकर भी सवाल
सरयू राय ने नगर निगम बोर्ड की बैठक को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बोर्ड की बैठक हर महीने होनी चाहिए.
उन्होंने बताया कि पिछली बैठक 18 अगस्त 2026 को हुई थी. यह बैठक चार महीने के अंतराल के बाद आयोजित की गई थी.
एक माह बीत जाने के बावजूद अगली बैठक की सूचना नहीं दी गई है. साथ ही पिछली बैठक की कार्यवाही भी बोर्ड सदस्यों को उपलब्ध नहीं कराई गई.
राय ने कहा कि नियमानुसार बैठक से 72 घंटे पहले कार्यसूची सभी प्रतिभागियों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए. पिछली बैठक में उन्हें कार्यसूची उपलब्ध नहीं कराई गई. उन्होंने कहा कि अन्य सदस्यों को केवल विचारणीय बिंदुओं की सूची भेजी गई थी.
वरीय अधिकारी की पदस्थापना पर सवाल
अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर भी सरयू राय ने सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी विजय कुमार वर्मा का पदस्थापन मानगो नगर निगम में हुआ है. राय के अनुसार, वर्मा अपर नगर आयुक्त से वरीय हैं. इसके बावजूद उन्हें उप नगर आयुक्त के पद पर उनके अधीन काम करना पड़ रहा है.
उन्होंने इसे सेवा संरचना की विचित्र स्थिति बताया. साथ ही कहा कि वरीय अधिकारी को कनीय अधिकारी के अधीन कनीय पद पर पदस्थापित करने के पीछे सरकार की क्या मंशा है, इस पर सरकार को अपने विवेक से निर्णय लेना चाहिए.
सरयू राय ने प्रधान सचिव से बिंदु 1 से 5 में उठाए गए मामलों की जांच की मांग की है. उन्होंने कार्य संपादन में अनियमितता पाए जाने पर अपर नगर आयुक्त के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई का आग्रह किया है. वहीं, बिंदु 6 में उठाई गई पदस्थापना संबंधी विसंगति पर सरकार से अपने विवेक के अनुसार निर्णय लेने का अनुरोध किया है.
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