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Jamshedpur News: 'टैक्स' ऑन, सुविधाएं 'ऑफ', बहरागोड़ा ISBT बस टर्मिनल प्रशासनिक उदासीनता का शिकार

बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत पी.डब्लू.डी चौक के समीप वर्ष 2013 में लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से अंतर-प्रांतीय बस टर्मिनल (ISBT) बनाया गया था, जो अब प्रशासनिक उदासीनता और उपेक्षा का शिकार हो गया. जिसके कारण बस टर्मिनल दिन-प्रतिदिन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है.
 

Himangshu karan

Baharagora: बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत पी.डब्लू.डी चौक के समीप वर्ष 2013 में लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से अंतर-प्रांतीय बस टर्मिनल (ISBT) बनाया गया था, जो अब प्रशासनिक उदासीनता और उपेक्षा का शिकार हो गया. जिसके कारण बस टर्मिनल दिन-प्रतिदिन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. यहां झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की बसें आती है. 

 

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जिस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य तीनों राज्यों के यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देना था, वह अब सरकार के लिए महज एक "सफेद हाथी" बनकर रह गया है. बिजली की रौशनी न होने से शाम ढलते ही यहां अंधेरा पसर जाता है. अंधेरे और असुरक्षा के खौफ से बसें अंदर नहीं जातीं है. चारों तरह गंदगी का अंबार लगा है.


यात्रियों को पीने के पानी के लिए लगाया गया सोलर जलमीनार पिछले एक साल से बंद पड़ा. वहीं शौचालय की स्थिति बदहाल है, विश्रामालय में बैठने का ठौर ठिकाना तक नहीं है. हालत यहां तक बदतर है कि छत पर उगे बड़े-बड़े जंगली पेड़ और दीवारों में पड़ी दरारें किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रही हैं, लेकिन अंचल प्रशासन का ध्यान सुविधाएं सुधारने के बजाय सिर्फ रोजाना राजस्व (टैक्स) वसूलने तक ही सीमित है. 


शाम 5 बजे ही टर्मिनल के बंद हो जाने के कारण कोलकाता, भुवनेश्वर रांची और जमशेदपुर जैसे प्रमुख शहरों के लिए रात में सफर करने वाले यात्रियों को जान जोखिम में डालकर नेशनल हाईवे-18 के ओवरब्रिज पर खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है, जो संबंधित विभाग के प्रशासनिक विफलता की जीता-जागता मिसाल है.

 

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