Search

जमशेदपुर : पूरे कोल्हान में मात्र 3 प्राचार्य, बाकी सभी कॉलेज प्रभारियों के भरोसे

Jamshedpur (Anand Mishra) : कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत चल रहे अंगीभूत कॉलेजों में प्राचार्यों की भारी कमी है. विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेज बिना प्राचार्य के ही चल रहे हैं. इस वजह से कॉलेजों में प्रशासनिक समेत अन्य कार्य समय-समय पर प्रभावित होते रहते हैं. पूर्णकालिक प्राचार्य नहीं होने की वजह से कहीं न कहीं शिक्षकों की कमी की समस्या से जूझ रहे कॉलेजों को और भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कोल्हान विश्वविद्यालय में कुल 19 अंगीभूत कॉलेज हैं, जिनमें से मात्र तीन कॉलेजों में ही प्राचार्य हैं. इसके अलावा शेष 16 अंगीभूत कॉलेज प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे चल रहे हैं. इस वजह से कॉलेजों का नैक एक्रिडिटेशन कार्य भी प्रभावित हो रहा है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-police-caught-the-wife-accused-of-killing-her-husband-after-high-voltage-drama/">जमशेदपुर

: हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद पति की हत्या की आरोपी पत्नी को पुलिस ने पकड़ा

बड़ा निर्णय लेने में कठिनाई

प्रभारी प्राचार्यों के मन में यह बना रहता है कि किसी प्राचार्य की पदस्थापना होने के बाद पुनः उन्हें शिक्षकों के बीच ही जाना है. इस कारण स्थिति यह है कि कॉलेज छात्रहित में भी अपने से कोई ठोस या बड़ा निर्णय नहीं ले पाते हैं. सभी निर्णय विश्वविद्यालय के ऊपर छोड़ दिये जाते हैं. इस वजह से किसी कार्य को पूरा होने में समय लगता है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-preparation-of-new-education-policy-and-shortage-of-teachers-from-new-session-in-kolhan-university/">जमशेदपुर

: कोल्हान विश्वविद्यालय में नये सत्र से नई शिक्षा नीति की तैयारी और शिक्षकों का टोटा

23 पीजी डिपार्टमेंट में भी प्रोफेसर के पद रिक्त

विश्वविद्यालय के 23 पीजी डिपार्टमेंट में प्रत्येक डिपार्टमेंट में प्रोफेसर के एक-एक स्वीकृत पद हैं. साथ ही एसोसिएट प्रोफेसर के दो-दो स्वीकृत पद हैं. ये सारे पद रिक्त हैं. इस वजह कुछ विभागों में तो असिस्टेंट प्रोफेसर हेड बनाये गये हैं. इनमें संस्कृत, टीआरएल आदि डिपार्टमेंट शामिल हैं. इसे भी पढ़ें : नए">https://lagatar.in/smc-conclave-of-80-excellent-schools-starting-from-new-session-on-march-17/">नए

सत्र से शुरू हो रहे 80 उत्कृष्ट विद्यालयों का एसएमसी कॉन्क्लेव 17 मार्च को

क्या है समस्या

पूर्णकालिक प्राचार्यों के नहीं होने के कारण एक सीनियर शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य बना कर कॉलेज या पीजी हेड की जिम्मेवारी सौंपी जाती है. कई ऐसे विभाग हैं, जिनमें मात्र एक या दो शिक्षक ही बचे हैं. ऐसे में जरूरत के अनुसार उन्हें प्रभारी प्राचार्य बना कर किसी कॉलेज की कमान सौंप दी गयी है. इसका एक उदाहरण गोलमुरी स्थित एबीएम कॉलेज है, जहां जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के एकमात्र हिंदी शिक्षक को एबीएम कॉलेज का प्रभारी बना कर पदस्थापित किया गया है. इसे भी पढ़ें : घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-principals-son-kumar-harsh-brought-laurels-to-the-district/">घाटशिला

: प्रिंसिपल के बेटे कुमार हर्ष ने किया जिले का नाम रोशन

इन कॉलेजों के नैक एक्रिडिटेशन की समय-सीमा पार

कई ऐसे कॉलेज हैं जिनका पूर्व में नैक एक्रिडिटेशन कराया गया था. उसके बाद समय-सीमा खत्म हो जाने के के बाद भी नैक नहीं कराया जा सका है. नैक रैंकिंग की मान्यता की अवधि पूरी होने के बाद दो वर्ष के अंदर पुनः नैक एक्रिडिटेशन कराना होता है. बावजूद कुछ ऐसे कॉलेज हैं, जिनका एक्रिडिटेशन अब तक नहीं हो सका है. इनमें जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज, ग्रेजुएट कॉलेज, घाटशिला कॉलेज, जेएलएन कॉलेज चक्रधरपुर, टाटा कॉलेज चाईबासा, महिला कॉलेज चाईबासा व अन्य शामिल है. इसे भी पढ़ें : नया">https://lagatar.in/new-controversy-tribal-leaders-and-organizations-opposed-shankaracharya-sadanand-saraswatis-statement/">नया

विवाद : शंकराचार्य सदानंद सरस्वती के बयान का आदिवासी नेताओं- संगठनों ने किया विरोध

कहां-कहां हैं प्राचार्य

जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज, काशी साहू कॉलेज सरायकेला. इनके अलावा शेष 16 कॉलेज प्रभारी प्रचार्यों के भरोसे हैं. [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp