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टिप्पणीः नाखून कटवा कर शहीद का दर्जा पाना चाहती है जमशेदपुर पुलिस

Ranchi :   जमशेदपुर पुलिस और अपराधियों के बीच 29-30 जनवरी की रात एक मुठभेड़ हुई. जिन अपराधियों के साथ मुठभेड़ हुई, वो पुलिस की हिरासत में थे. पुलिस ने कैरव गांधी अपरहण कांड में उन्हें गिरफ्तार किया था. पुलिस हिरासत में हथकड़ी लगे अपराधी अगर पुलिस से ही हथियार छीन ले तो यह पुलिस के लिए शर्म की बात है.

 

पुलिस की थ्योरी यह बता रही है कि वे अपराधियों के बयान के आधार पर हथियार बरामद करने के लिए आधी रात को अपराधियों को लेकर साईं मंदिर गयी थी. वहां हथकड़ी लगे अपराधियों ने उनसे कारबाईन छीन ली और फायरिंग की. पुलिस वाले बाल-बाल बच गये. जवाबी कार्रवाई में तीनों अपराधियों को गोली लगी. लेकिन साईं मंदिर के पास छिपा कर रखे गये हथियार बरामद कर लिये गये. 

 

पुलिस का यह दावा कुछ अजीब सा लगता है. क्योंकि यह सामान्य ज्ञान से मेल नहीं खाता है. यह तो तय है कि अपराधियों ने व्यापारी का अपहरण करते वक्त सुरक्षा कारणों से अपना-अपना हथियार अपने-अपने पास रखा होगा. अपहरण के बाद पुलिस की सरगर्मी से अपराधी व्यापारी को लेकर इधर-उधर भागते रहे होंगे. व्यापारी की बरामदगी के बाद पुलिस ने अपराधियों को पकड़ ही लिया. ऐसे में वे अपना हथियार छिपाने साई मंदिर के पास कब आये? यह समझ से परे है. 

 

ऐसा लगता है कि पुलिस ने व्यापारी के अपहरण से लेकर बरामदगी तक में हुई अपनी नाकामी को छिपाने के लिए एक कहानी गढ़ी है. जिस कहानी में कई खामियां हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस तरह की हर कहानी में पुलिस बाल-बाल बच जाती है. साई मंदिर के पास हुई मुठभेड़ में भी पुलिस वाले बाल-बाल बच गये. 

 

साईं मंदिर के पास से अपराधियों के बयान पर बरामद हथियार के सिलसिले में पुलिस ने अब तक यह नहीं बताया कि व्यापारी का अपहरण करने के बाद अपराधी अपना हथियार छिपाने साई मंदिर के पास कब आये थे. अपहृत व्यापारी की तलाश में हाथ पैर मारती पुलिस हथियार छिपाने आये अपराधियों को पकड़ने से कैसे चूक गयी. और अब चाहती है कि कुछ ऐसा करें कि लोगों की वाहवाही मिलने लगे. नाम हो जाये. व्यापारियों का संगठन स्वागत में समारोह करने लगे. ऐसा लगता है बाल-बाल बचने की बात बताकर पुलिस नाखून कटवा कर शहीद का दर्जा पाना चाहती है.

 

यह पूरा मामला जिस तरह से सामने आया है, वह पुलिस विभाग के लिए अलार्मिंग है. पुलिस के सीनियर अधिकारी इसकी ठीक से पड़ताल करें. और जमशेदपुर पुलिस के अक्षमता के जिम्मेदारों पर कार्रवाई करे. नहीं तो ऐसी घटनाएं बढ़ती ही जाएंगी. जिलों की पुलिस काम ठीक से करेंगे नहीं और हीरोगिरी दिखाने के चक्कर में ऐसे-ऐसे काम करेंगे जिससे पुलिस की छवि ही खराब होगी. 

 

 

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