Search

 
 
 

युवती और उसके माता-पिता की सुरक्षा सुनिश्चित करें जमशेदपुर SSP: हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने एक हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) की सुनवाई करते हुए जमशेदपुर के एसएसपी को निर्देश दिया कि युवती और उसके माता-पिता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी एसएसपी की होगी.
 

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एक हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) की सुनवाई करते हुए जमशेदपुर के एसएसपी को निर्देश दिया कि युवती और उसके माता-पिता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी एसएसपी की होगी. मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ में बुधवार को हुई. 


युवती व उसकी मां कोर्ट में हुईं पेश

सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश के आलोक में युवती और उसकी मां को प्रस्तुत किया गया. युवती ने कोर्ट को बताया कि वह उच्च शिक्षित है और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भाग ले चुकी है. उसने कहा कि उसे किसी प्रकार की मानसिक बीमारी या असंतुलन नहीं है, लेकिन उसके भाई ने जबरन उसे कांके स्थित डेविस इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री में भर्ती कराया और बाद में उसे RINPAS, रांची भेज दिया. 

 

भाई ने संपत्ति के लालच में पुश्तैनी संपत्ति बेची

युवती ने आरोप लगाया कि उसके भाई ने संपत्ति की लालच में ऐसा किया और बाद में दादा की संपत्ति को गिफ्ट डीड के जरिए अपने नाम कराकर बेच भी दिया. उसने बताया कि वर्तमान में वह जमशेदपुर के कदमा थाना क्षेत्र में किराये के मकान में अपने बीमार माता-पिता के साथ रह रही है और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही है. 

पिता गंभीर बीमारियों से ग्रस्त

युवती ने कोर्ट को यह भी बताया कि उसके पिता गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और उन्हें चलने-फिरने में भी दिक्कत है. उसने आशंका जताई कि यदि वह अपने भाई के खिलाफ बोलेगी तो वह उसे और उसके माता-पिता को धमकी दे सकता है, क्योंकि पहले भी वह मारपीट और धमकी दे चुका है. युवती के अनुसार उसके भाई ने उसके शैक्षणिक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अपने पास रख लिए हैं. सुनवाई के दौरान महिला की मां ने भी बेटी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वह अपने बेटे की गतिविधियों के कारण भय में जीवन यापन कर रही हैं.

 

युवती के भाई और  मामा का मोबाइल नंबर मिला-पुलिस

सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से बताया गया कि पुलिस ने युवती के भाई और उसके मामा का मोबाइल नंबर प्राप्त कर लिया है. अदालत ने युवती के भाई को भी इस मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है. बताया गया कि वह फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में काम कर रहा है. चूंकि भाई का पता उपलब्ध नहीं है, इसलिए अदालत ने मिनिस्ट्री ऑफ़ एक्सटर्नल अफेयर्स, भारत सरकार के सचिव को भी मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया, ताकि उसके पते का पता लगाकर उसे अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा जा सके.

 

खंडपीठ ने विदेश मंत्रालय को अगली सुनवाई तक इस संबंध में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को होगी .

 

क्या है मामला

मामले में याचिकाकर्ता रंजीत सिंह ने हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दाखिल कर दावा किया कि उनकी मंगेतर (लगभग 41 वर्ष) को उसके परिवार ने संपत्ति विवाद के कारण मानसिक रूप से स्वस्थ होने के बावजूद रांची के मानसिक अस्पताल में भर्ती करा दिया. याचिका के अनुसार दोनों की मुलाकात वर्ष 2023 में एक मैट्रिमोनियल साइट के जरिए हुई थी और परिवार की सहमति से रोका और सगुन की रस्में भी हो चुकी थीं. बाद में विवाह अक्टूबर 2024 में तय किया गया था.

 

संपत्ति छोड़ने का दबाव, नहीं मानने पर विवाद

याचिका में आरोप लगाया गया कि अगस्त 2024 में महिला के भाई ने ऑस्ट्रेलिया से आकर विवाह के लिए पैतृक संपत्ति में हिस्सा छोड़ने का दबाव डाला. मना करने पर कथित रूप से धमकियां दी गईं. इसके बाद 27 अगस्त 2024 को दोनों को कदमा थाना बुलाया गया, जहां महिला की मां ने आरोप लगाए. याचिकाकर्ता के अनुसार इसके कुछ दिन बाद महिला अचानक गायब हो गई और उसका मोबाइल भी बंद हो गया. 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही