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जमशेदपुर : स्टार्ट-अप  राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं - पाठक

Jamshedpur ( Sunil Pandey) : सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) अपने तकनीकी नवाचारों और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए एक सप्ताह एक प्रयोगशाला (ओडब्ल्यूओएल) कार्यक्रम का अभियान चला रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य उद्योगों की जरूरतों और क्षेत्रों की पहचान तथा वैज्ञानिक समाधान प्रदान करना है. प्रयोगशाला में चौथे दिन बुधवार को टेक्नोप्रेन्योरशिप की बैठक और शिल्पकार मेला आयोजित किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक मौजूद थे. अपने व्याख्यान में उन्होंने अनुसंधान को प्रौद्योगिकी में बदलने और बौद्धिक संपदा (आईपी) से आर्थिक लाभ प्राप्त करने की आवश्यकता के बारे में बताया. उन्होंने उल्लेख किया कि स्टार्ट-अप राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि आज के स्टार्ट-अप कल के औद्योगिक दिग्गज हैं.  इस प्रकार, व्याख्यान के अंत में उन्होंने उल्लेख किया कि टीडीबी के माध्यम से स्टार्ट-अप और अन्य हितधारकों को एक मंच पर एक साथ लाने में कार्य करती है. कार्यशाला के दूसरे भाग में गणमान्य लोगों ने भी कार्यशाला के विषय पर पैनल चर्चा में भाग लिया और शोधकर्ताओं, स्टार्ट-अप्सआदि के साथ बातचीत की. कार्यशाला के प्रतिभागियों में एमएसएमई, उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ शोध छात्र भी शामिल थे. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-excise-department-raids-potka-and-parsudih-one-arrested/">जमशेदपुर

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आर्थिक विकास के लिए कारीगरों के महत्व पर जोर

कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि जेसीपीएसीएल के प्रबंध निदेशक सह अध्यक्ष सीआईआई झारखंड चैप्टर डॉ. उज्जल चक्रवर्ती ने दर्शकों को जमशेदपुर शहर के महान इतिहास की याद दिलाई जहां देश का पहला इस्पात संयंत्र स्थापित किया गया था. उस समय यह एशिया का दूसरा संयंत्र था. उन्होंने ऑटोमोबाइल, बुनियादी ढांचे के विकास जैसे सभी क्षेत्रों में इस्पात के महत्व पर जोर दिया और आगे स्वदेशी तकनीकों को विकसित करने हेतु इसकी आवश्यकताओं का उल्लेख किया. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सीएसआईआर-एनएमएल उद्योग के सहयोग से धातु विज्ञान में समर्पित अनुसंधान करने वाले पहले अनुसंधान संगठनों में से एक था. उन्होंने इस्पात उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों और इसके अनुप्रयोगों के लिए उच्च शक्ति वाले स्टील के विकास, क्षरण की रोकथाम, अयस्कों का सज्जीकरण और प्रक्रिया एवं  नवाचार तथा उद्यमिता के लिए पारिस्थितिकी तंत्र बनाने जैसे अनुसंधान के माध्यम से उन पर काबू पाने की आवश्यकता पर बात की. इसे भी पढ़ें : अश्लील">https://lagatar.in/obscene-video-chat-case-cp-singh-asks-banna-to-answer-6-questions/">अश्लील

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धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र, मुरादाबाद के महाप्रबंधक डॉ रवींद्र शर्मा ने देश के आर्थिक विकास के लिए कारीगरों के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने एमएचएससी के कार्यों और सुविधाओं और कारीगरों के कौशल उन्नयन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाले उत्पाद का उचित मूल्य और उत्पादन सुनिश्चित करके कारीगरों के उत्थान के लिए हम कैसे प्रयास करें इस पर विस्तार से बताया. उन्होंने विशेष रूप से सीएसआईआर-एनएमएल द्वारा विकसित उत्पाद "ब्रास केयर" का उल्लेख करते हुए अनुसंधान और विकास में सीएसआईआर-एनएमएल के साथ निरंतर सहयोग पर भी बात की. डॉ. स्मिता पुथुचेरी, परियोजना सह-समन्वयक, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने बताया कि टीडीबी का उद्देश्य उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स और उद्योगों को बाजार तक उपलब्ध कराने हेतु वित्तीय और प्रबंधन सहायता देकर बाजार के लिए तैयार तकनीक के साथ मदद करना है इससे पहले  डॉ. अवनीश कुमार श्रीवास्तव, निदेशक सीएसआईआर-एनएमएल ने अतिथियो का स्वागत किया और टेक्नोप्रेन्योरशिप बैठक के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा मंच है जहां पर उद्यमी, स्टार्ट-अप और उद्योग एक साथ मिल सकते थे. और सीएसआईआर-एनएमएल में व्यावसायीकरण के लिए तैयार तकनीकों का पता लगा सकते थे. उन्होंने आगे कहा कि यह आत्मनिर्भरता की दिशा में मेक इन इंडिया के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उद्योग, स्टार्ट-अप और अनुसंधान के बीच एक जुट होने में मदद करेगा. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-khalasi-died-in-a-truck-parked-on-nh-side-police-engaged-in-investigation/">जमशेदपुर

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पीतल कारिगरों ने कार्यक्रम में लिया हिस्सा

सीएसआईआर-एनएमएल एक सप्ताह एक प्रयोगशाला कार्यक्रम शिल्पकार मेला (कारीगरों की बैठक) का आयोजन किया गया. जिसमें पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और झारखंड के पीतल के कारीगरों ने हिस्सा लिया. इस दौरान एक प्रदर्शनी लगायी गई. शिल्पकार मेला के एक भाग के रूप में पीतल के कारीगरों के साथ एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया. डॉ. रवींद्र कुमार शर्मा, जिन्हें धातु परिष्करण के क्षेत्र में अत्यधिक अनुभव है और भारत सरकार के तहत धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र के महाप्रबंधक ने दूरस्थ क्षेत्रों में कारीगरों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को साझा किया और बैठक में उपस्थित सभी लोगों की मदद की. डॉ. के.एल. साहू, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-एनएमएल ने कारीगरों को मौजूदा निर्यात दर में सुधार के लिए अपने उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार करने के बारे में व्यावहारिक सुझाव दिए. डॉ. ए.के. मोहंती ने पीतल की कलाकृतियों के लिए लैकर के विकास पर इस उपलब्धि का विवरण साझा किया और कई धातु सतहों के लिए लागत प्रभावी लैकर विकसित करने की अपनी यात्रा के बारे में जानकारी दी. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-deva-scientific-got-big-relief-from-the-high-court-the-case-in-the-lower-court-was-canceled/">जमशेदपुर

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