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बोम्माला कोलुवु गुड़ियों की एक पारंपरिक और कलात्मक प्रदर्शनी है
तेलुगु समुदाय कल्याण संघ की झारखंड इकाई के अध्यक्ष रमन्ना अचारी ने बताया कि बोम्माला कोलुवु प्रतियोगिता तेलगु समाज की पारंपरिक परंपरा है. यह दशहरा के मौके पर आयोजित किया जाता है. जिससे समाज के लोग अपनी परंपरा एवं संस्कृति से अवगत हो सकें. उन्होंने बताया कि बोम्माला कोलुवु गुड़ियों की एक पारंपरिक और कलात्मक प्रदर्शनी है, जिसे आमतौर पर हिंदू घरों और मंदिरों में महिलाएं सजाती हैं. यह मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों में लड़कियों और महिलाओं (विवाहित व अविवाहित) द्वारा नवरात्रि के दौरान किया जाता है. गुड़ियों को आमतौर पर विषम संख्या में लकड़ी के रैक या सीढ़ियों पर सजाया जाता है. जिनकी संख्या 3, 5, 7 से लेकर अधिकतम 9 तक होती है, जो नवरात्रि के नौ दिव्य दिनों का प्रतीक होती है. इसे भी पढ़ें : Adityapur">https://lagatar.in/adityapur-dev-prakash-becomes-state-general-secretary-of-rjd/">Adityapur: देव प्रकाश राजद के प्रदेश महासचिव बने
सबसे अच्छी व कलात्मक सजावट को पुरस्कृत किया जाएगा
12 अक्टूबर तक समाज के घरों एवं मंदिरों में कलात्मक गुड़ियों की प्रदर्शनी रहेगी. जिसका मूल्यांकन आंध्रा महिला कमिटी द्वारा किया जाएगा. सबसे अच्छी व कलात्मक सजावट को पुरस्कृत किया जाएगा. राज्य समन्वयक जी. गोपाल कृष्ण ने कहा कि यह पहल तेलुगु धरोहर को संरक्षित करना और झारखंड में विशेष रूप से युवाओं के बीच तेलुगु संस्कृति, परंपरा एवं भाषा के साथ साथ सामुदायिक एकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. मौके पर टीसीडब्ल्यूए के कार्यकारी अध्यक्ष बी श्रीनिवास, महिला इकाई की अध्यक्ष जी. विजय लक्ष्मी, जी. गोपाल कृष्ण, वाई रमा समेत अन्य उपस्थित रहे. इसे भी पढ़ें : डॉक्टर">https://lagatar.in/doctor-rape-murder-case-kolkata-police-did-not-allow-mega-rally-to-junior-doctors/">डॉक्टररेप-हत्या मामला : कोलकाता पुलिस ने जूनियर डॉक्टरों को मेगा रैली की अनुमति नहीं दी [wpse_comments_template]
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