Jamtara News: दिन में सब कुछ शांत... और जैसे ही सूरज ढलता है, हिंगलो नदी का सन्नाटा ट्रैक्टरों की आवाज से टूटने लगता है. बागडेहरी थाना क्षेत्र के अकना पुल के सामने हिंगलो नदी से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर बालू उठाव और उसे पश्चिम बंगाल भेजे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं. स्थानीय सूत्रों का दावा है कि रात के अंधेरे में रोजाना 50 से 60 ट्रैक्टर तक बालू ढोया जा रहा है.
सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि नदी से बालू कौन उठा रहा है, बल्कि सवाल यह है कि इतने ट्रैक्टर आखिर किसकी नजर से बचकर निकल रहे हैं?
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थाने से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर सिकंदरपुर के रास्ते कथित रूप से बालू लदे वाहनों की आवाजाही हो रही है. अगर यह दावा गलत है तो प्रशासन मौके पर जाकर रात में जांच क्यों नहीं करता? और अगर सही है तो फिर कार्रवाई की फाइल आखिर किस मेज पर धूल फांक रही है?
शायद प्रशासन की नजर में रात होते ही कानून भी सो जाता है और नदी भी निजी संपत्ति बन जाती है! दिन में नियम-कानून की बातें होती हैं, लेकिन रात के अंधेरे में उन्हीं नियमों की परीक्षा कौन ले रहा है—यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह गतिविधि कई दिनों से जारी है. ऐसे में प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठना लाजिमी है. क्या जिम्मेदार विभाग को भनक नहीं, या फिर भनक होने के बावजूद गहरी नींद में है. इधर बागडेहरी थाना प्रभारी किशन कुमार ने साफ कहा कि उनके थाना क्षेत्र में किसी प्रकार का अवैध बालू कारोबार नहीं चल रहा है.
अब सवाल सीधा है—यदि अवैध कारोबार नहीं चल रहा, तो रात में नदी घाट और सड़कों पर ट्रैक्टरों की कथित आवाजाही की सच्चाई क्या है? प्रशासन चाहे तो एक रात की औचक जांच में इन तमाम सवालों का जवाब दे सकती है.
नदी से बालू निकल रहा है या नहीं, इसका फैसला बयान से नहीं, मौके की जांच से होगा. अब देखना है कि प्रशासन जांच करता है या फिर सबूत आने का इंतजार करता रहेगा.
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