Jamtara News : जामताड़ा डिसी आलोक कुमार ने जिले में अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने का सख्त निर्देश जारी किया है. लेकिन नारायणपुर प्रखंड क्षेत्र में इसका असर कहीं नजर नहीं आ रहा है. प्रखंड में बालू के बाद अब चंपापुर इलाके में सफेद पत्थर (क्वार्टज) का अवैध कारोबार जोर पकड़ रहा है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर प्रशासन और खनन विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां है?
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नारायणपुर थाना क्षेत्र के चितामी, घटयारी व नयाडीह घाटों से अवैध बालू उठाव की शिकायतों के बाद अब चंपापुर में सफेद पत्थर के अवैध खनन, भंडारण और परिवहन का मामला सामने आया है. चंपापुर स्कूल से बेड़वा जाने वाले रास्ते के समीप सफेद पत्थरों का स्टॉक किया जा रहा है.
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से सफेद पत्थर खोदकर ट्रैक्टरों के माध्यम से एक जगह लाकर जमा किया जा रहा है. रात के अंधेरे में इसे हाइवा के माध्यम से इसे गोविंदपुर-साहिबगंज हाइवे होते हुए पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल भेजा जाता है. वहां इसकी बिक्री मोटे दाम पर की जाती है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पत्थर का खनन और परिवहन वैध है, तो उसका दस्तावेज कहां है और यदि वैध नहीं है तो कार्रवाई कौन करेगा? ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र में सफेद पत्थर के खनन को लेकर किसी प्रकार का लाइसेंस नहीं है. इसके बावजूद लंबे समय से इसका अवैध कारोबार जारी है.
विडंबना यह है कि अवैध खनन रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर निर्देश तो लगातार जारी होते हैं, लेकिन खनन माफियाओं की इसकी तनिक भी परवाह नहीं है. आदेश कागज पर निकलता है और खनिज जमीन से गायब हो जाता है. इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा. ग्रामीणों ने प्रशासन से स्टॉक की वैधता, खनन अनुमति और परिवहन दस्तावेजों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
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