Dumka News: संथाल परगना में अवैध बालू खनन और परिवहन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. जामताड़ा की अजय नदी के बाद अब दुमका की मयूराक्षी नदी भी कथित बालू तस्करों के निशाने पर है. आरोप है कि मयूराक्षी नदी के सिलाजारी इलाके से अवैध तरीके से बालू निकालकर श्यामपुर में डंप किया जा रहा है. इसके बाद बालू को ट्रकों में लोड कर बंगाल भेजे जाने की बात सामने आ रही है.
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, इलाके में अवैध बालू कारोबार का नेटवर्क मंडल बंधुओं के माध्यम से संचालित होने की चर्चा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी से बालू निकालकर पहले श्यामपुर में जमा किया जाता है. खनन विभाग की टीम के जांच के लिए पहुंचने से पहले ही डंप की गई बालू को ट्रकों में लोड कर बाहर भेज दिया जाता है. इससे जांच के दौरान मौके पर बालू की वास्तविक मात्रा का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. मामले में थाना प्रभारी रानेश्वर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका सरकारी फोन नंबर बंद मिला.

अवैध बालू डंप करने के स्थान पर जांच करते अधिकारी
पुराने स्टॉक के नाम पर भी सवाल
दुमका जिले में JSMDC के माध्यम से पुराने बालू स्टॉक की नीलामी के लिए टेंडर किया गया था. जानकारी के अनुसार, एमएस कंपनी ने यह टेंडर हासिल किया है. रामेश्वर के परिहरपुर में करीब 1.54 लाख सीएफटी पुराने बालू स्टॉक का टेंडर किया गया है. दुमका के आसपास भी पुराने स्टॉक की नीलामी की गई है.
अब सवाल उठ रहा है कि टेंडर की गई सीमित मात्रा के बावजूद हर दूसरे-तीसरे दिन दर्जनों ट्रकों में बालू भरकर बाहर भेजे जाने की स्थिति कैसे बन रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने स्टॉक और नदी से निकाली गई ताजा बालू की अलग-अलग निगरानी होनी चाहिए.
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श्यामपुर में मिले डंप के निशान
मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को जिला खनन कार्यालय को श्यामपुर में बालू डंप होने की सूचना मिली थी. अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बालू डंप किए जाने के निशान भी देखे. इसके बाद जिस जमीन पर बालू डंप की गई थी, उसके मालिक के खिलाफ प्राथमिकी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अंचल कार्यालय से जमीन संबंधी रिकॉर्ड मांगा गया है. थाना को भी खनन विभाग की ओर से लिखित सूचना दिए जाने की जानकारी है.

ट्रकों से अवैध बालू ले जाने का तस्वीर
अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि श्यामपुर में मिली बालू वैध पुराने स्टॉक की थी या मयूराक्षी नदी से निकालकर वहां डंप की गई थी. स्टॉक का भौतिक सत्यापन और परिवहन दस्तावेजों की जांच से पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है.
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