Ranchi News : आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों के पहचान संबंधी दस्तावेजों की समस्या ‘लगातार न्यूज’ ने खबर को प्रमुखता से प्रकाशित की थी. खबर के बाद पुलिस मुख्यालय ने संज्ञान लिया है. डीजीपी तदाश मिश्रा ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
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पुलिस मुख्यालय की ओर से अब ओपन जेलों में बंद आत्मसमर्पित नक्सलियों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जिन पूर्व नक्सलियों के नाम या अन्य विवरण गलत दर्ज हैं, उन्हें भी दुरुस्त कराया जाएगा.
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद एक टीम गठित कर जांच का आदेश दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले भी पत्र लिखकर जरूरी सुधार करने के लिए कहा जा चुका है.
अब टीम बैठक कर ओपन जेलों का दौरा करेगी और वहां रह रहे आत्मसमर्पित नक्सलियों के दस्तावेजों की स्थिति की जानकारी लेगी. जिनके पास आधार, पैन, बैंक पासबुक समेत जरूरी कागजात नहीं हैं, उन्हें बनवाने की कार्रवाई की जाएगी.
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि सरकार पर विश्वास और झारखंड पुलिस पर भरोसे के कारण ही इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए पुलिस और प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करेगा. उनकी कोई भी समस्या सामने आती है तो उसका तत्काल समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे आने वाले समय में सम्मान के साथ अपना रोजगार कर सकें और समाज में बेहतर जिंदगी जी सकें.
डीजीपी ने जंगल में भटके हुए नक्सलियों से भी अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की सरेंडर पॉलिसी का लाभ उठाएं और पुलिस-प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें. सरकार और पुलिस उनके पुनर्वास और बेहतर भविष्य के लिए हरसंभव सहयोग करेगी.
झारखंड में 167 नक्सलियों ने छोड़ी बंदूक
झारखंड पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2021 से जुलाई 2026 तक राज्य में 167 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. वर्ष 2021 में 20, 2022 में 14, 2023 में 26, 2024 में 24, 2025 में 38 और जुलाई 2026 तक 45 नक्सलियों ने हथियार छोड़े. संगठन से दूरी बनाने के बाद इन लोगों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जिंदगी में लौटने का फैसला किया.
देशभर की बात करें तो केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2024 से मार्च 2026 तक 3,927 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. अकेले वर्ष 2025 में 2,337 नक्सलियों ने हथियार डाले. केंद्र की नक्सल नीति में आत्मसमर्पण और पुनर्वास को महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है.
हजारीबाग ओपन जेल में 86 पूर्व नक्सली
हजारीबाग ओपन जेल में वर्तमान में 86 आत्मसमर्पित नक्सली रह रहे हैं. यहां से सामने आई जानकारी में पुनर्वास से जुड़ी कई समस्याएं सामने आई थीं. कुछ के पास आधार कार्ड नहीं है तो किसी के पास पैन कार्ड और पहचान से जुड़े अन्य दस्तावेज नहीं हैं. कई लोगों के पास बैंक पासबुक तक नहीं है. आधार कार्ड नहीं होने के कारण बैंक खाता खोलने में भी परेशानी की बात सामने आई है.
दस्तावेजों के अलावा जमीन, आवास, कौशल प्रशिक्षण, बच्चों की पढ़ाई और इलाज जैसी सुविधाओं से जुड़े मामले भी लंबित बताए गए हैं. यानी बंदूक छोड़कर मुख्यधारा में लौटे इन लोगों के सामने अब जंगल की लड़ाई नहीं, बल्कि कागज और सरकारी व्यवस्था से जुड़ी मुश्किलें हैं.
स्पेशल ब्रांच ने भी मांगी जानकारी
मामला सामने आने के बाद झारखंड स्पेशल ब्रांच मुख्यालय ने हजारीबाग जेल अधीक्षक को पत्र लिखकर आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिल रही पुनर्वास सुविधाओं और लंबित मामलों की जानकारी मांगी है. साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता समेत जरूरी दस्तावेज तैयार कराने की दिशा में कार्रवाई करने को कहा गया है.
अब यह भी जांच का विषय होगा कि किस पूर्व नक्सली को पुनर्वास योजना के तहत कौन-कौन सी सुविधा मिली है, किसका मामला लंबित है और वर्षों बाद भी कुछ लोग बुनियादी पहचान दस्तावेजों से क्यों वंचित हैं.
SIR के बीच दस्तावेजों की कमी ने बढ़ाई चिंता
राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के बीच पूर्व नक्सलियों के दस्तावेजों का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है. हालांकि पूर्व नक्सली होना किसी व्यक्ति को मतदाता बनने से अयोग्य नहीं करता. पात्र भारतीय नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने भी स्पष्ट किया है कि नक्सली रहा होना अपने आप में मतदाता बनने से अयोग्यता का आधार नहीं है. जो व्यक्ति भारतीय नागरिक है और निर्धारित पात्रता पूरी करता है, वह मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है. ऐसे लोग अपने परिवार के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं.
नीति है, अब जमीन पर अमल की बारी
केंद्र सरकार की पुनर्वास नीति में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए आर्थिक सहायता, मासिक वजीफा, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आवास जैसी सुविधाओं का प्रावधान है.
मौजूदा केंद्रीय नीति के तहत वरिष्ठ कैडर के लिए पांच लाख रुपये और अन्य कैडर के लिए 2.5 लाख रुपये की सहायता, 36 महीने तक 10 हजार रुपये मासिक वजीफा और हथियार और गोला-बारूद जमा करने पर अतिरिक्त सहायता का प्रावधान है.
झारखंड में भी आत्मसमर्पण नीति के तहत आर्थिक सहायता, हथियारों के बदले मुआवजा, कौशल प्रशिक्षण, जमीन और पुनर्वास से जुड़ी सुविधाएं देने की व्यवस्था है. लेकिन हजारीबाग ओपन जेल से सामने आया मामला यह सवाल खड़ा करता है कि आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया कागजों से आगे जमीन पर कितनी पहुंची है. अब पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद पूर्व नक्सलियों को पहचान और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने की पहल से इस समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है.
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