Jamtara : सरकारी कागजों की एक गलती ने एक बुजुर्ग दंपति की जिंदगी को दो साल तक मुश्किलों में डाल दिया. नारायणपुर प्रखंड के रामपुर गांव निवासी गुलाब सिंह अपनी पत्नी चूड़ा देवी के साथ उपायुक्त के जनता दरबार पहुंचे.
आंखों में आंसू और आवाज में बेबसी थी. उन्होंने उपायुक्त से कहा, साहब, मेरी पत्नी को दो साल पहले ही कागजों में मृत बता दिया गया. इसके बाद उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद हो गई. हम दोनों की कोई संतान नहीं है. पेंशन ही सहारा थी.अब दवा-पानी और रोजमर्रा का खर्च कैसे चले विडंबना यह है कि चूड़ा देवी, जिन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था, वे खुद जनता दरबार में अपने पति के साथ जीवित खड़ी थीं.
यह दृश्य सरकारी व्यवस्था की बड़ी चूक पर सवाल भी खड़ा करता है. आखिर जब एक जिंदा महिला को मृत मान लिया गया, तो उसकी सुध लेने वाला कोई क्यों नहीं थाबुजुर्ग दंपति की व्यथा सुनते ही उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और एक माह के भीतर पेंशन की राशि उनके खाते में आनी शुरू हो जाएगी. उन्होंने बुजुर्ग दंपति को भरोसा दिलाया कि केंद्र से राशि जारी होते ही उन्हें नियमित पेंशन मिलने लगेगी.
एक ओर यह मामला सरकारी तंत्र की लापरवाही को उजागर करता है, तो दूसरी ओर उपायुक्त की संवेदनशीलता भी सामने आई. जनता दरबार में उन्होंने केवल शिकायत नहीं सुनी, बल्कि तत्काल समाधान का भरोसा देकर बुजुर्ग दंपति के चेहरे पर उम्मीद की किरण लौटा दी.यह घटना याद दिलाती है कि सरकारी फाइलों की एक छोटी-सी गलती किसी गरीब और असहाय व्यक्ति के लिए जीवनभर का संघर्ष बन सकती है. ऐसे में समय पर सुनवाई और संवेदनशील प्रशासन ही आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा बनता है.


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