
बताया जाता है कि शहरबेड़ा गांव निवासी मोनू टुडू की अचानक तबीयत बिगड़ गई. इसके बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया. काफी प्रयास के बावजूद एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी.
ऐसे में मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रामीण और परिजनों ने मरीज को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर खटिया रखकर जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचाया. लेकिन फिर भी वह उनकी जान नहीं बचा सके. अस्पताल में इलाज के दौरान मोनू टुडू की मौत हो गई.
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. उनका कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती तो संभवतः मरीज की जान बचाई जा सकती थी. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है.
बता दें कि जामताड़ा जिले में एंबुलेंस की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है. महीने पहले तक जिले में 13 एंबुलेंस संचालित थीं. लेकिन वर्तमान में उनमें से 8 एंबुलेंस खराब पड़ी हैं. इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और संबंधित एजेंसी को कई बार अवगत कराया गया है.
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी दावों के बावजूद दूरदराज के गांवों तक समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं.
मोनू टुडू की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक और नाराजगी का माहौल है. ग्रामीणों ने मांग की है कि जिले की एंबुलेंस व्यवस्था को अविलंब दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज को समय पर इलाज के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े.
बता दें कि इससे पहले भी मधुबन थाना क्षेत्र के दालुवाडीह गांव से ऐसी तस्वीर सामने आई थी. यहां सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई थी. ऐसे में प्रसव पीड़ा से तड़पती एक गर्भवती महिला को खाट पर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा था, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया था.
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