Ranchi: झारखंड विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान विधायक जनार्दन पासवान ने अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाए. उन्होंने कहा कि इन वर्गों के उत्थान के लिए केवल बजट का प्रावधान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि योजनाओं को धरातल पर सही तरीके से लागू करना भी जरूरी है.
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जनार्दन पासवान ने अनुसूचित जाति की बालिकाओं के लिए चल रहे आवासीय विद्यालयों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में कई विद्यालय पिछले दस वर्षों से केवल मध्य विद्यालय स्तर तक ही सीमित हैं. उन्होंने सरकार से मांग की कि इन विद्यालयों को 10 प्लस 2 स्तर तक अपग्रेड किया जाए ताकि छात्राएं अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़ें और आगे की शिक्षा प्राप्त कर सकें.
उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रावासों की जर्जर स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कई छात्रावास काफी पुराने हो चुके हैं और उनकी हालत खराब है. कई जगहों पर भवनों की छत से पानी टपकता है और रहने और बाथरूम की व्यवस्था भी ठीक नहीं है. उन्होंने सरकार से इन भवनों की मरम्मत और सुधार के लिए कदम उठाने की मांग की.
विधायक ने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति और प्रशासनिक संसाधनों की कमी का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि कई जगहों पर अधिकारियों की भारी कमी है. उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनके जिले में 17 सीडीपीओ के पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल दो अधिकारी ही तैनात हैं. इसके अलावा निरीक्षण के लिए वाहनों की भी कमी है, जिससे एक अधिकारी को तीन से पांच प्रखंडों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है.
सदन में अपनी बात रखते हुए जनार्दन पासवान ने सरकार से इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने और अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की.
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