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29 मार्च को होगी JET 2024 परीक्षा, जेपीएससी सचिव की ओर से हाईकोर्ट को दी गई जानकारी

Ranchi : झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट (JET)  2024 परीक्षा 29 मार्च 2026 को होगी. मई 2026 के दूसरे सप्ताह में इसका रिजल्ट निकाले जाने की संभावना है। इसकी जानकारी गुरुवार को शपथ पत्र के माध्यम से जेपीएससी सचिव की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को दीं। मामले में प्रार्थी की ओर से समय की मांग की गई। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल निर्धारित की। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।  गुरुवार को असिस्टेंट प्रोफेसर व शिक्षकेत्तरकर्मियों की नियुक्ति को लेकर दायर जनहित याचिका पर कोर्ट सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई।
 
जेपीएससी की फाइल फोटो

Ranchi : झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट (JET) 2024 परीक्षा 29 मार्च 2026 को होगी. मई 2026 के दूसरे सप्ताह में इसका रिजल्ट निकाले जाने की संभावना है. इसकी जानकारी गुरुवार को शपथ पत्र के माध्यम से जेपीएससी सचिव की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को दीं. मामले में प्रार्थी की ओर से समय की मांग की गई. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल निर्धारित की.

 

जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. गुरुवार को असिस्टेंट प्रोफेसर व शिक्षकेत्तरकर्मियों की नियुक्ति को लेकर दायर जनहित याचिका पर कोर्ट सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई.

 

 

दरअसल, पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जेपीएससी सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर बताने को कहा था कि टेस्ट (JET) परीक्षा 24 आयोजित करने की फाइनल तिथि क्या है और इसकी तैयारी के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं. जेपीएससी अंडर सेक्रेटरी की ओर से  मार्च माह में संभावित तिथि  JET परीक्षा आयोजित करने बताए जाने को कोर्ट ने गंभीरता से लिया था और इसे वेग बताया था.

 

खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा था कि जब उक्त परीक्षा के लिए 175000 परीक्षार्थियों ने फॉर्म भर दिया है और दिसंबर 2025 में फॉर्म भरने की अंतिम तिथि समाप्त हो गई है. तो इसके बाद ढाई माह तक क्यों इंतजार किया गया. JET परीक्षा आयोजित क्यों नहीं की गई. पिछले कई वर्षों से JET परीक्षा आयोजित नहीं हुई है. प्रतीत होता है कि JET परीक्षा को लेकर जेपीएससी गंभीर नहीं है. 

 

 

क्या है याचिका में

उल्लेखनीय है कि प्रार्थी अनिकेत ओहदार व अन्य की ओर से जनहित याचिका दायर की गयी है. इसमें कहा गया है कि रांची विश्वविद्यालय में लंबे समय से असिस्टेंट प्रोफेसरों व शिक्षकेत्तरकर्मियों की नियुक्ति नहीं की गयी है. संविदा के आधार पर ही  नियुक्ति की जा रही है, जो नियमों का उल्लंघन है. प्रार्थी ने संविदा के बदले नियमित नियुक्ति करने की मांग की है.

 

 

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