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झा. बजट सत्रः नीरा यादव बोलीं- पलामू सर्किट हाउस की स्थिति बदहाल, चिटकनी हाथ में आ जाती

  • द्वितीय अनुपूरक कटौती प्रस्ताव पर चर्चा
  • अधिकारी विधायक को वैल्यू नहीं देते हैं
  • विद्यालयों में हाथ धोने के लिए साबुन नहीं

Ranchi : झारखंड विधानसभा चुनाव के बजट सत्र के चौथे दिन द्वितीय अनुपूरक कटौती प्रस्ताव पर चर्चा की शरुआत करते हुए कहा कि हम शत्रु नहीं. नीतियों व विचारधारा के आधार पर विरोध करते हैं. हम आलोचना जरूर करें, लेकिन जब विकास की बात आये तो एकजुट होने की जरूरत है. 

 

नीरा यादव ने केरल के अंचल कार्यालय का जिक्र किया. कहा कि वहां के अंचल कार्यालय में भीड़ नहीं होती. क्योंकि वहां समय पर काम हो जाता है. यहां तो भीड़ लगी होती है. ओडिशा का सर्किट हाउस देखने से लगता है कि वह प्राईवेट गेस्ट हाउस है. लेकिन पलामू सर्किट हाउस में चिटकनी हाथ में आ गया. पानी खोलने पर नल हाथ में आ गया. 

 

आज कई गंभीर मामले देखे जा रहे हैं, बजट से समस्याओं के निदान की उम्मीद भी है. किस विभाग ने किस स्तर से राशि खर्च की, इस पर जाना चाहते हैं. अनुपयोगी योजनाओं में खर्च किया जा रहा है. लेकिन विधायकों द्वारा दी जाने वाली योजनाएं नहीं ली जाती है.

 

क्या सिर्फ मार्च की वजह से अधिकारी कहीं भी राशि खर्च देंगे. पता नहीं किन्हें खुश करने के लिए पहले हो चुके शिलान्यास, उद्घाटन को फिर से उद्घाटन किया जा रहा है. स्थानीय विभाग को जानकारी नहीं रहती.

 

भूमि संरक्षण विभाग के हिमांशु कुमार ने ट्रैक्टर व अन्य सामानों का वितरण किया. विधायक को नहीं बुलाया. पूछने पर कहा कि निर्देश नहीं हैं. कटसी में बुलाते हैं. अधिकारी खुद अनावरण कर रहे हैं, हरी झंडी दिखाते हैं. विधायकों को बताते भी नहीं.

 

नीरा यादव ने कहा कि करमा स्वास्थ्य केंद्र अभी अधूरा है. लेकिन हमें जवाब दिया गया है कि अप्रैल में काम पूरा हो जायेगा. लेकिन यह कैसे होगा. काम तो अभी आधा ही हुआ है. 50 प्रतिशत काम भी नहीं हुआ है. सरकार का जवाब ही गलत है. 

 

लोन लेकर किसी तरह झारखंड सरकार काम चला रही. अगर सरकार पर बोझ बढ़ा है, तो आगे भी बढ़ेगा. विकास शिक्षण संस्थानों से शुरु होती है. स्कूलों का सिलेबस बदल गया है.

 

स्कूलों में ना पढ़ाई है ना खाना सिर्फ अव्यवस्थाओं का रोना है. स्कूलों में विकास मद की राशि भी नहीं पहुंच रही है. शौचालय में हाथ धोने के लिए साबुन तक नहीं.

 

महिला डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई तक शुरु नहीं किया जा सका है. सिर्फ बिल्डिंग बना लेकिन वहां पढ़ाई नहीं हो रही. आग्रह है झारखंड के सभी महिला डिग्री कॉलेज, मेडिकल कॉलेज की वर्तमान व्यवस्था की रिपोर्ट लिया जाये और कार्रवाई की जाये. श्यामा प्रसाद विश्वविद्यालय में ना शिक्षक हैं, ना लाईब्रेरी है. इस पर ध्यान देने की जरूरत है. 

 

घर-घर में पानी पहुंचाने के लिए पाईप लाईन है. टंकी है. लेकिन नल टूटा हुआ है. एक आग्रह है कि सड़क किनारे के सूखे पेड़ हैं, जो दुर्घटना का कारण बन सकता है. कोडरमा-डोमचांच रोड में पुराने पेड़ है. किसानों को सिंचाई की सुविधा देने की जरूरत है.

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