Ranchi: झारखंड ने प्राथमिक शिक्षा में शून्य ड्रॉपआउट का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल कर लिया है. नीति आयोग की हालिया स्कूली शिक्षा पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के शिक्षा में सकारात्मक बदलाव सामने आया है. माध्यमिक कक्षाओं में भी बड़ा सुधार हुआ है. यहां स्कूल छोड़ने वाले बच्चों का आंकड़ा 23.2% से घटकर महज 3.5% पर आ गया है.
सीखने का स्तर अब भी कमजोर
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में राज्य ने बच्चों को स्कूल में बनाए रखने के मामले में अभूतपूर्व प्रगति की है. शैक्षणिक वर्ष 2014-15 में प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 6.41% थी, जो शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में शून्य हो गई है. उच्च प्राथमिक स्तर पर भी यह दर 7.42% से घटकर सिर्फ 1.7% रह गई है. सबसे बड़ा बदलाव माध्यमिक स्तर पर दिखा है, जहां पिछले दस वर्षों में 20 प्रतिशत का सुधार हुआ है. यहां ड्रॉपआउट रेट अब केवल 3.5% रह गया है. हालांकि राज्य में छात्रों के सीखने का स्तर (लर्निंग आउटकम्स) अब भी कमजोर है.
ट्रांजिशन रेट में सुधार की जरूरत
रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों को क्लासरूम तक लाने और उन्हें स्कूल में रोके रखने में तो राज्य सफल रहा है, लेकिन बुनियादी शिक्षा के स्तर पर अभी और काम करने की जरूरत है. इसके अलावा स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करना जरूरी है. ट्रांजिशन रेट में सुधार यानी माध्यमिक के बाद उच्च शिक्षा में बच्चों का दाखिला बढ़ाने की जरूरत है. अब राज्य सरकार के सामने मुख्य चुनौती ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम रखने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर और प्रभावी बनाना है.
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