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SRFTI परिसर में हिंसा के विरोध में झारखंड के फिल्मकारों का प्रदर्शन, छात्रों की सुरक्षा की मांग

Ranchi News: झारखंड में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर मेघनाथ ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को ‘शाखा’ में बदलने की कोशिश की जा रही है और वे इस संघर्ष में SRFTI के छात्रों के साथ खड़े हैं.
 
छात्रों की सुरक्षा की मांग करते फिल्मकार

Ranchi News: सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) परिसर में कार्यक्रम को लेकर छात्रों और एक बाहरी संगठन से जुड़े लोगों के बीच हुई हिंसक झड़प के विरोध में झारखंड के फिल्म मेकर्स, डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर्स, शोधकर्ताओं और छात्रों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने घटना पर आक्रोश जताते हुए संस्थान में शांति बहाल करने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की.

 

मीडिया संस्थान ‘लाइव लगातार’ की संवाददाता रिया किस्पोटा की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब आरएसएस से संबद्ध अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) की ओर से संस्थान के प्रतिबंधित शैक्षणिक परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसी परिसर में छात्रों की नियमित फिल्म स्क्रीनिंग और दीक्षांत समारोह जैसे कार्यक्रम होते हैं. छात्रों ने बाहरी संगठन के पोस्टरों और कार्यक्रम का विरोध किया.

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आरोप है कि विरोध के दौरान संगठन से जुड़े लोगों ने छात्रों के साथ मारपीट की और डंडे, पत्थर तथा धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया. घटना में करीब 20 छात्रों के घायल होने की बात सामने आई है, जिनमें लगभग 10 छात्रों की स्थिति गंभीर बताई गई है. कई घायल छात्रों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

 

घटना में मेघराज उरांव नामक आदिवासी छात्र की पीठ पर धारदार हथियार से वार किए जाने का आरोप है. वहीं, एक अन्य छात्र के जबड़े में पत्थर लगने से फ्रैक्चर हुआ है और उसकी सर्जरी की बात कही गई है. प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, घटना के दौरान कुछ छात्रों को ‘अर्बन नक्सली’ कहकर भी संबोधित किया गया. घटना के बाद संस्थान के मुख्य द्वार के बाहर बाहरी लोगों की मौजूदगी और गश्त को लेकर छात्रों में भय का माहौल होने की बात कही गई है.

 

झारखंड में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर मेघनाथ ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को ‘शाखा’ में बदलने की कोशिश की जा रही है और वे इस संघर्ष में SRFTI के छात्रों के साथ खड़े हैं. शोधकर्ता दीप्ति मैरी ने सवाल उठाया कि किसी शैक्षणिक संस्थान में कार्यक्रम के नाम पर लाठी, डंडे और चाकू कहां से आए.

 

लेखक महादेव टोप्पो ने कहा कि SRFTI देश के प्रतिष्ठित फिल्म संस्थानों में शामिल है, जहां छात्र मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बनाते हैं. ऐसे परिसर में हिंसा की घटना को उन्होंने गंभीर और निंदनीय बताया. डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर बीजू टोप्पो ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर परिसर में शांति बहाल करने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की.

 

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि SRFTI में प्रवेश पाने वाले छात्रों को JET परीक्षा और करीब सात दिनों तक चलने वाली कठिन इंटरव्यू प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. ऐसे रचनात्मक और शैक्षणिक माहौल में हिंसा की घटना से छात्रों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर असर पड़ने की चिंता भी जताई गई.

 


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