Ranchi News: झारखंड सरकार अपने ही अपर लोक अभियोजक से कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट में हार गयी है. मामला सहायक लोक अभियोजक (APP) से प्रभारी लोक अभियोजक (PP) का काम लेने और रिटायरमेंट के बाद इस पद का लाभ नहीं देने से संबंधित है. हाईकोर्ट ने PP के पद का लाभ देने का आदेश दिया था. राज्य सकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गयी थी. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की याचिका खारिज कर दी.
उल्लेखनीय है कि एकीकृत बिहार से समय 1984 में जय प्रकाश की नियुक्ति सहायक लोक अभियोजक (APP) के पद पर हुई थी. राज्य विभाजन के बाद उन्हें झारखंड कैडर आवंटित किया गया. इसके बाद उन्हें सरायकेला में APP के पद पर पदस्थापित किया. वर्ष 2008 में उनका तबादला सरायकेला से जमशेदपुर सिविल कोर्ट में किया गया. साथ ही उन्हें APP के साथ ही जिला एवं सत्र न्यायालय के प्रभारी लोक अभियोजक (PP) का काम भी सौंपा गया. सरकार ने 11-3-2008 को इससे संबंधित आदेश जारी किया. इसमें इस बात का उल्लेख किया कि वह सीनियर पद और उसके वेतन के लिए दावा नहीं कर सकेंगे.
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इसके बाद सरकार ने जय प्रकाश को अपर लोक अभियोजक के पद तक प्रोन्नति दी. 28 फरवरी 2014 को वह अपर लोक अभियोजक के पद से रिटायर हुए. रिटायरमेंट से पहले उन्होंने सरकार ने PP के पद के अनुरूप वेतन व सुविधाएं देने की मांग की. लेकिन सरकार ने इसे देने से इनकार कर दिया. इस मांग को लेकर उन्होंने रिटायमेंट से पहले 2013 में हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की. इसमें सरकार द्वारा 11-3-2008 को जारी आदेश में सीनियर पद पर प्रोन्नति और वेतन नहीं देने की शर्त को रद्द करने और PP के पद पर प्रोन्नति सहित सुविधाएं देने की मांग की. हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद जय प्रकाश के पक्ष में फैसला दिया. कोर्ट ने उन्होंने PP का वेतन सहित अन्य सुविधाएं देने का आदेश दिया.
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सप्रीम कोर्ट में अपील की. इसकी सुनवाई न्यायाधीश एजी मसीह और न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल की पीठ में हुई. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की दलील सुनने के बाद अक्तूबर 2026 में याचिका खारिज दी. इस तरह 13 साल तक चली कानूनी लड़ाई में सरकार अपने ही वकील से हार गयी.
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