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झारखंड के पास पर्याप्त जड़ी बूटी, मगर सरकार के पास औषधि अनुसंधान केंद्र का प्रस्ताव नहीं

Ranchi: झारखंड में अब तक जन औषधि अनुसंधान केंद्र स्थापित नहीं किया गया है. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग से मिली सूचना के अनुसार राज्य सरकार के स्तर पर इस प्रकार का कोई प्रस्ताव भी तैयार नहीं किया गया है.


राज्य गठन के करीब 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी झारखंड में एक भी जन औषधि अनुसंधान केंद्र की स्थापना नहीं हो सकी है. जबकि झारखंड को जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है और यहां के जंगलों में कई प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं.

यह भी बताया गया कि राज्य के आदिवासी समुदाय लंबे समय से जंगलों में उपलब्ध जड़ी-बूटियों और अपने पारंपरिक लोक ज्ञान के आधार पर विभिन्न बीमारियों का उपचार करते रहे हैं. आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय वैद्य गंभीर बीमारियों, यहां तक कि कैंसर जैसे रोगों के उपचार की पारंपरिक जानकारी रखते हैं.

 

 

इन तथ्यों के बावजूद पिछले 25 वर्षों में राज्य में औषधीय अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं किए जाने से झारखंड के ग्रामीण अंचलों में उपचार की परपारंगत लोक ज्ञान विस्मृत होने की ओर है.

 

इन राज्यों में है औषधि अनुसंधान केन्द्र

भारत में औषधि अनुसंधान से जुड़े कई प्रमुख संस्थान अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (CDRI) है, जो उत्तर प्रदेश में स्थित है, क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (RARI)  झांसी,केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान पंजाबी बाग, नई दिल्ली.

गुजरात: में आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान जामनगर और औषधीय एवं सुगंधित पौधा अनुसंधान केंद्र – आणंद है.

राजस्थान: में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर है.

मध्य प्रदेश: में क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर है.

पंजाब/चंडीगढ़: में राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली में है.

अन्य राज्यों जिसमें हाजीपुर (बिहार), हैदराबाद (तेलंगाना), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), गुवाहाटी (असम) में भी राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान स्थित हैं.

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