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झारखंड HC का बड़ा फैसला : DACP का लाभ सिर्फ केस लड़ने वालों को नहीं, सभी समान पद के डॉक्टरों को मिलेगा

Ranchi :   झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के मेडिकल अधिकारियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा है कि डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) योजना का लाभ केवल उन डॉक्टरों को नहीं दिया जा सकता, जिन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की थी, बल्कि उसी पद और कैडर के सभी योग्य अधिकारियों को यह फायदा मिलेगा.

 

नीति के दायरे में आने वाले सभी स्वत: लाभ के हकदार हैं

जस्टिस आनंद सेन की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि अगर किसी नीति की कोई तारीख (कट-ऑफ डेट) अदालत द्वारा गलत घोषित कर दी जाती है, तो उसका असर केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रह सकता.

 

ऐसे मामलों में उस नीति के दायरे में आने वाले सभी अधिकारी स्वतः लाभ के हकदार बन जाते हैं. चाहे उन्होंने अदालत में याचिका दायर की हो या नहीं. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब कोई नीति पुनर्जीवित होती है, तो उसका लाभ सभी समान रूप से स्थित अधिकारियों को दिया जाना चाहिए, न कि केवल मुकदमा लड़ने वालों को.

 

कट ऑफ डेट बदलने से प्रमोशन-वेतन प्रभावित हुए

दरअसल राम प्रसाद सिंह और अन्य डॉक्टर, सभी राज्य सरकार के मेडिकल कैडर के सदस्य हैं, ने याचिका दायर कर सरकार से मांग की थी कि उन्हें DACP योजना, 5वें और 6वें वेतन आयोग के अनुरूप 2002 और 2008 से मिलने वाले सारे लाभ और बकाया का भुगतान किया जाए.

 

डॉक्टरों का कहना था कि राज्य सरकार ने पहले DACP योजना को 5 अप्रैल 2002 और 29 अक्टूबर 2008 से लागू किया था, लेकिन बाद में 11 सितंबर 2013 के एक आदेश से कट-ऑफ डेट बदलकर 1 सितंबर 2008 कर दी.

 

इसके बाद 15 जनवरी 2014 को सरकार ने पहले से मिले लाभ वापस भी ले लिए, जिससे कई अधिकारियों के प्रमोशन और वेतन प्रभावित हुए.

 

हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच का आदेश बदला

इस विवाद को लेकर पहले कई याचिकाएं दायर हुई थीं, जिन्हें सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था. लेकिन 2018 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच का आदेश रद्द करते हुए कहा कि कट-ऑफ डेट बदलने का फैसला गलत था. राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली.


संशोधित नीति रद्द होती तो पुरानी नीति स्वत: लागू हो जाती

सरकार ने अदालत में कहा कि मौजूदा याचिकाकर्ता फेंस सिटर्स हैं, यानी उन्होंने शुरू में नीति को चुनौती नहीं दी थी, इसलिए उन्हें अब लाभ नहीं मिलना चाहिए. लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि जब डिवीजन बेंच ने नीति को बहाल कर दिया, तो उसका लाभ अपने आप सभी पात्र अधिकारियों को मिलेगा. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई संशोधित नीति रद्द होती है, तो पुरानी नीति स्वतः लागू हो जाती है.

सरकार आठ हफ्ते में लाभ व बकाया राशि दे

अदालत ने आदेश दिया कि राज्य सरकार अब डिवीजन बेंच के फैसले के अनुसार सभी समान रूप से स्थित मेडिकल अधिकारियों को DACP योजना का पूरा लाभ दे. इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी परिणामी लाभ और बकाया राशि को आदेश की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर जारी किया जाए.

डॉक्टरों को मिली बड़ी राहत

इस फैसले से झारखंड सरकार के सैकड़ों मेडिकल अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है. अब उन्हें भी DACP के तहत मिलने वाले प्रमोशन और वेतन लाभ मिल सकेंगे, जो पहले केवल कुछ याचिकाकर्ताओं को मिल रहे थे.

 

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