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झारखंड : शर्तों के साथ डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर लगी रोक को स्वास्थ्य विभाग ने लिया वापस

Ranchi : झारखंड के सरकारी डॉक्टर अब प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें होंगी. 20 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की अध्यक्षता में हुई त्रिपक्षीय मीटिंग की कार्यवाही निकली गयी है. कार्यवाही में 15 जुलाई की कंडिका 5 के तहत चिकित्सक किसी निजी अस्पताल/ नर्सिंग होम या डायग्नोस्टिक सेंटर में अपनी सेवा नहीं देंगे के प्रावधान पर पुनर्विचार किए जाने का निर्णय लिया गया है. वहीं, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के द्वारा किए गए इलाज के बाद उसी संख्या के अनुरूप निजी अस्पतालों में इलाज करने को लेकर निर्देशित किया गया है. हालांकि, इस पर झासा के अध्यक्ष और सचिव ने कहा कि इस समीकरण पर असमंजस की स्थिति है. संघ ने अपर मुख्य सचिव और स्वास्थ्य मंत्री से पुनर्विचार कर इसे व्यावहारिक बनाने का अनुरोध किया है. इसे भी पढ़ें – झारखंड-">https://lagatar.in/there-is-no-place-in-jharkhand-bihar-where-security-forces-are-not-accessible-dg-crpf/">झारखंड-

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डॉक्टरों की मेहनत के बदौलत सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी हो रहा इलाजः सचिव

झासा के राज्य सचिव डॉ ठाकुर मृत्युंजय सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य एक आकस्मिक सेवा है. इस सेवा से जुड़े सभी सरकारी चिकित्सक के दिन-रात की मेहनत के बदौलत हमारा राज्य सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने में सफल रहा है. झारखंड ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन में पूरे देश में बेहतर स्थान प्राप्त किया है. यहां अच्छे चिकित्सकों की संख्या भी कम है. इनके कार्यों के लिए इन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए. लेकिन इन्होंने आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से संबंधित कुछ प्राइवेट अस्पतालों में अपनी सेवा दी है. जिसे इनका अपराध मान लिया गया और प्रपत्र (क) जैसे संगीन आरोप लगा दिये गये. ऐसे में विभाग के आला अधिकारियों से संघ की अपील है कि इन चिकित्सकों के विरुद्ध प्रपत्र (क) जैसे संगीन आरोप पर पुनर्विचार कर इन्हें आरोप से मुक्त किया जाए. साथ ही इस बात को दोहराया कि किसी भी चिकित्सक की अनुपस्थिति मात्र के कारण नेशनल मेडिकल काउंसिल को उसके रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की अनुशंसा करना न्याय संगत नहीं है. इस पर भी पुनर्विचार करने की जरूरत है. इसे भी पढ़ें – विधायक">https://lagatar.in/non-bailable-warrant-issued-against-nine-including-mla-mamta-devi-know-what-is-the-matter/">विधायक

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इन शर्तों के साथ सरकारी डॉक्टर कर सकते हैं प्राइवेट प्रैक्टिस

  • आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से संबंधित चार प्राइवेट अस्पतालों से सूचीबद्ध हो सकते हैं.
  • किसी भी सरकारी चिकित्सक द्वारा उपलब्ध कराए गए सूचीबद्ध अस्पतालों के नाम बदलने के लिए कम से कम 3 महीने का वक्त तय किया गया है.
स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही में लिए गए निर्णय निम्नलिखित हैं- 
  • सरकारी अस्पताल में यदि रोगियों के इलाज के लिए चिकित्सक को सर्जरी या अन्य चिकित्सा सेवा के लिए मशीन की आवश्यकता है तो उसकी सूची 15 सितंबर 2022 तक अपने जिले के सिविल सर्जन के माध्यम से विभाग को अवगत कराएंगे. ताकि विभागीय स्तर से मशीन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्यवाही की जा सके.
  • आईएमए और झासा के प्रतिनिधियों द्वारा सरकारी अस्पतालों में सेवा नहीं देने वाले डॉक्टरों के ऊपर विभागीय स्तर से समुचित कार्रवाई करने के लिए सहमति दी गई.
  • क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता है, तो अधिनियम के प्रावधानों की समीक्षा कर सुसंगत प्रस्ताव समर्पित करने के लिए आईएमए और झासा के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया गया है.
  • मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट से संबंधित सुझाव में समीक्षा करने पर सहमति बनी.
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