Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड एवं अन्य कंपनियों द्वारा दायर कई अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है.
हाई कोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट के आदेशों के पालन में लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है.
इन मामलों में राज्य सरकार द्वारा कोर्ट के 4 मार्च 2025 के आदेश के अनुपालन के लिए समय बढ़ाने की मांग की गई थी. यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी 15 दिसंबर 2025 को पुष्टि किया जा चुका है.
सरकार की ओर से दलील दी गई कि राशि के भुगतान से संबंधित फाइल विभागीय स्तर पर स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के कारण कैबिनेट की बैठक नहीं हो सकी.
“इलेक्ट्रॉनिक युग में यह बहाना स्वीकार्य नहीं”
कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आज का दौर इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का है और यदि सरकार गंभीर होती तो वर्चुअल माध्यम से भी कैबिनेट की स्वीकृति ली जा सकती थी. ऐसे में आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगना पूरी तरह गलत दृष्टिकोण है.
सुनवाई के दौरान मामले में खान एवं भूविज्ञान विभाग के सचिव को पूर्व आदेश के बावजूद व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होने पर भी कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. सचिव की ओर से व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए आवेदन दाखिल किया गया था, जिसमें बताया गया कि वे मुख्यमंत्री के साथ विदेश यात्रा पर हैं. जिसपर
कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब सचिव को पहले से कोर्ट के आदेश की जानकारी थी, तो विदेश जाने से पहले छूट का आवेदन क्यों नहीं दिया गया?
जब सचिव देश से बाहर हैं, तो उनके नाम से शपथ पत्र कैसे दायर किया गया? किस अधिकार से उप सचिव ने प्रतिनिधि के रूप में यह आवेदन दाखिल किया? खंडपीठ ने कहा कि इन सभी सवालों का संतोषजनक जवाब संबंधित अधिकारियों को देना होगा. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जनवरी की तिथि निर्धारित की है.
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