Search

 
 
 

झारखंड में पहली बार नेशनल फॉरेस्ट कांग्रेस का आयोजन, 10 से 12 दिसंबर तक जुटेंगे देशभर के विशेषज्ञ

Ranchi : राष्ट्रीय फॉरेस्ट कांग्रेस में शामिल होने के लिए 17 अक्टूबर से निशुल्क रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होगी, जो 20 नवंबर तक चलेगी. शोधकर्ताओं को भी अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा. इसके लिए अधिकतम 350 शब्दों में शोध सार (Abstract) 20 नवंबर तक जमा करना होगा. चयनित शोधकर्ताओं को सम्मेलन में अपने शोध को मौखिक रूप से प्रस्तुत करने या पोस्टर के माध्यम से दिखाने का अवसर मिलेगा.
 
राष्ट्रीय फॉरेस्ट कांग्रेस

Ranchi : झारखंड में पहली बार राष्ट्रीय वानिकी कांग्रेस (National Forestry Congress-2026) का आयोजन होने जा रहा है. यह सम्मेलन रांची के मोरहाबादी स्थित SKIPA ऑडिटोरियम में 10 से 12 दिसंबर तक होगा. झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से आयोजित सम्मेलन में देशभर के वन वैज्ञानिक, पर्यावरणविद्, वन अधिकारी, शोधकर्ता और नीति निर्माता शामिल होंगे. 

 

इस सम्मेलन में जंगलों को बचाने, वन्यजीवों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं पर चर्चा होगी. साथ ही यह भी विचार किया जाएगा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जंगलों की बेहतर देखभाल कैसे की जा सकती है. 

 

इसे भी पढ़ें


20 नवंबर तक करा सकते हैं निशुल्क रजिस्ट्रेशन

राष्ट्रीय फॉरेस्ट कांग्रेस में शामिल होने के लिए 17 अक्टूबर से निशुल्क रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होगी, जो 20 नवंबर तक चलेगी. शोधकर्ताओं को भी अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा. इसके लिए अधिकतम 350 शब्दों में शोध सार (Abstract) 20 नवंबर तक जमा करना होगा. चयनित शोधकर्ताओं को सम्मेलन में अपने शोध को मौखिक रूप से प्रस्तुत करने या पोस्टर के माध्यम से दिखाने का अवसर मिलेगा. 

 

महत्वपूर्ण तिथियां

  • - 17 नवंबर : रजिस्ट्रेशन शुरू
  • - 20 नवंबर : रजिस्ट्रेशन और शोध सार (अधिकतम 350 शब्दों में) जमा करने की अंतिम तिथि
  • - 25 नवंबर :  स्वीकृत शोध सार की सूचना
  • - 30 नवंबर :  पूरी शोध जमा करने की अंतिम तिथि
  • -10 से 12 दिसंबर : राष्ट्रीय वानिकी कांग्रेस का आयोजन


12 विषयों पर होगी चर्चा

सम्मेलन में जंगलों और पर्यावरण से जुड़े 12 प्रमुख विषयों पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे. इनमें वन संरक्षण, जैव विविधता, वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, कृषि वानिकी, वन्यजीव संरक्षण और कार्बन भंडारण जैसे विषय शामिल हैं. इसके अलावा खराब हो चुके जंगलों को दोबारा हरा-भरा बनाने, जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने और वन संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर भी चर्चा होगी.

 

GIS और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से जंगलों की निगरानी करने के तरीकों पर भी विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे. साथ ही जंगलों की सुरक्षा में स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.

 

झारखंड को इस सम्मेलन से क्या होगा फायदा?

पीसीसीएफ संजीव कुमार ने लगातार न्यूज को बताया कि राज्य के लगभग एक-तिहाई भौगोलिक क्षेत्र में जंगल और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद हैं. साल के घने जंगल और छोटानागपुर पठार की जैव विविधता झारखंड की खास पहचान हैं. इस सम्मेलन से राज्य को अपनी वन संपदा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा.

 

देशभर से आने वाले विशेषज्ञों के अनुभव का लाभ राज्य को कई क्षेत्रों में मिल सकता है.  खासकर खनन के कारण प्रभावित हुए जंगलों को फिर से विकसित करने, वनाग्नि यानी जंगलों में लगने वाली आग को रोकने और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए नई तकनीकों की जानकारी मिलेगी. 

 

इसके अलावा महुआ, साल बीज, तेंदूपत्ता और लाख जैसे लघु वनोपज को बेहतर तरीके से तैयार करने और उनके लिए अच्छे बाजार उपलब्ध कराने पर भी सुझाव मिल सकते हैं. इससे वन आधारित ग्रामीण आजीविका मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ेंगी. साथ ही राज्य के शोध संस्थानों और विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी सहयोग का अवसर मिलेगा.

 

इससे पहले नई दिल्ली में हुआ था राष्ट्रीय फॉरेस्ट कांग्रेस का आयोजन

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के रिकॉर्ड के अनुसार, इससे पहले 2011 में राष्ट्रीय फॉरेस्ट कांग्रेस का आयोजन किया गया था, जो 22 से 25 नवंबर तक चला था. हालांकि वर्ष 2026 में झारखंड में आयोजित होने वाली नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस इससे अलग नाम वाला आयोजन है.


ISFR-2023 के आंकड़े भी होंगे चर्चा में

भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2023 के अनुसार, देश में कुल वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग किलोमीटर है.  यह भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 25.17 प्रतिशत है. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल कार्बन स्टॉक 7,285.5 मिलियन टन आंका गया है. सम्मेलन में जंगलों को सुरक्षित रखने, पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाने और वातावरण से कार्बन को सोखने की क्षमता मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही