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झारखंड बारूद के ढेर पर बैठा है : गिरिराज सिंह

Ranchi : केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने रांची स्थित भाजपा कार्यालय में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आपातकाल की बरसी पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र की हत्या करते हुए देश में आपातकाल लागू किया था, जिसे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन माना जाता है.

 

 

गिरिराज सिंह ने कहा कि इंदिरा गांधी पर चुनावी धांधली का आरोप लगने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जून 1975 को उनके खिलाफ फैसला सुनाया. इसके बावजूद उन्होंने सत्ता से चिपके रहने का फैसला लिया. सुप्रीम कोर्ट में भी उन्हें राहत नहीं मिली. 24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और 25 जून की रात तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के माध्यम से देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया. अगले दिन 26 जून को इंदिरा गांधी ने रेडियो पर इसका एलान किया.

 

उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान लाखों लोगों को जेल में डाल दिया गया, जिनमें महिलाएं और कर्मचारी भी शामिल थे. लगभग 25,000 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. मस्जिदों और मंदिरों को तोड़ा गया, लाखों लोगों की जबरन नसबंदी की गई. करीब 77,000 लोग धार्मिक स्थलों के नाम पर विस्थापित हुए. कांग्रेस पर हमला तेज करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि आज राहुल गांधी लोकतंत्र की बात कर रहे हैं, लेकिन वही पार्टी लोकतंत्र को कुचलने वाली रही है. कांग्रेस को 25-26 जून को देश से माफी मांगनी चाहिए. कहा कि आज की पीढ़ी को आपातकाल के अत्याचारों के बारे में जानना चाहिए, ताकि लोकतंत्र की रक्षा हो सके.

 

झारखंड पर भी साधा निशाना

गिरिराज सिंह ने झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आज झारखंड बारूद के ढेर पर बैठा है, और यह बारूद है 'जमाई टोला'. यहां बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को वोट बैंक की राजनीति के तहत बसाया जा रहा है, जिससे आदिवासियों की जनसंख्या घट रही है.

 

उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड में आजादी की तीसरी लड़ाई लड़नी होगी. जब तक आदिवासी बचेगा, तब तक आदिवासी नेतृत्व बचेगा. उन्होंने यह भी मांग की कि राज्य में पूर्ण रूप से पेशा कानून लागू किया जाए और अवैध जंगल, भूमि व खनन के अधिकार आदिवासियों को दिए जाएं. गिरिराज सिंह ने कहा कि इंदिरा गांधी ने सत्ता के लालच में आपातकाल लगाया था, लेकिन हेमंत सोरेन ने तो उससे भी आगे बढ़कर झारखंड की अस्मिता से खिलवाड़ किया है.

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