Vinit Upadhyay Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने 99 वर्षीय हत्या के अभियुक्त को जमानत देने से इंकार कर दिया है. अभियुक्त अमारात मियां उर्फ अमारात हुसैन पर वर्ष 1983 में एक व्यक्ति की हत्या का आरोप लगा था. जिसके बाद उसने निचली अदालत से अग्रिम जमानत ली थी. अग्रिम जमानत मिलने के बाद करीब 38 वर्षों तक अदालत की किसी भी कार्यवाही में शामिल नहीं हुआ. इस दौरान उसकी जमानत के लिए कोर्ट द्वारा निर्धारित गई शर्तों की भी अवहेलना हुई. जिसके बाद जमानत टूट गई. जिसके बाद पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर निचली अदालत ने अभियुक्त को वर्ष 2013 में भगोड़ा घोषित कर दिया था. इसे भी पढ़ें-सीएम">https://lagatar.in/jharkhand-news-khunti-district-administration-will-provide-government-accommodation-to-constable-mukti-purti-on-the-instructions-of-cm-hemant-soren/">सीएम
के निर्देश पर कॉस्टेबल मुक्ति पूर्ति को सरकारी आवास मुहैया कराएगा खूंटी जिला प्रशासन केस दर्ज होने के करीब 39 वर्षों बाद आरोपी ने सरेंडर किया और हाईकोर्ट में नियमित जमानत के लिए अर्जी दाखिल की. प्रार्थी की ओर से हाईकोर्ट के अधिवक्ता शशांक शेखर प्रसाद अदालत के समक्ष उपस्थित हुए. उन्होंने अपने मुवक्किल की उम्र का हवाला देते हुए जमानत देने का आग्रह किया. वहीँ कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से पक्ष रख रहे लोक अभियोजक विनीत वशिष्ठ ने जमानत अर्जी का पुरजोर विरोध किया. उन्होंने कहा कि जमानत मांग रहा अभियुक्त हत्या का आरोपी है. निचली अदालत से अग्रिम बेल मिलने के बाद करीब 39 वर्षों तक वह सोची-समझी साजिश के तहत फरार रहा, और अब हाईकोर्ट से उम्र के आधार पर बेल मांग रहा है. लेकिन इसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अमारत मियां की अर्ज़ी खारिज करते हुए उसे जमानत देने से इंकार कर दिया. जमानत अर्जी पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुभाष चांद की कोर्ट में सुनवाई हुई. इसे भी पढ़ें-साहिबगंज:">https://lagatar.in/jharkhand-news-sahibganj-martyrs-sido-kanhu-remembered-on-their-birth-anniversary-cm-hemant-soren-paid-tribute/">साहिबगंज:
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जमानत के बाद 39 साल फरार, हिरासत में आने के बाद मांगी बेल तो हाईकोर्ट ने किया इनकार, 99 साल का है आरोपी

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