Ranchi : कोरोना काल के दौरान झारखंड के विभिन्न जिलों में हुई बड़े पैमाने पर जंगल कटाई के बहुचर्चित मामले में सीआईडी ने एक बार फिर जांच तेज कर दी है. मामले की जांच एक आईपीएस और दो डीएसपी रैंक के अधिकारी कर रहे हैं.
झारखंड हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जांच एजेंसी ने पुराने दस्तावेजों और साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा शुरू कर दी है. मामले में वन विभाग के अधिकारियों और अन्य आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है.
सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच को फिर से गति दी गई है. अब तक इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. जबकि दो अन्य आरोपी जमानत पर हैं. जांच एजेंसी सभी आरोपियों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है.
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में लॉकडाउन के दौरान पलामू, रांची, जामताड़ा और चाईबासा समेत कई जिलों में सैकड़ों कीमती पेड़ों की कटाई की गई थी. आरोप है कि वन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से पेड़ों को काटकर 200 से अधिक ट्रकों के माध्यम से बाहर भेजा गया था. मामला सामने आने के बाद विभिन्न थानों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसकी जांच बाद में सीआईडी को सौंप दी गई थी.
सीआईडी जांच में वन विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है. जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया है कि तत्कालीन रेंजर महाराज सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तत्कालीन फॉरेस्टर मुहाफिज अंसारी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मिल चुकी है. मामले में अन्य अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच जारी है.
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान जांच में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी और राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा था. अदालत की सख्ती के बाद सीआईडी ने मामले की फाइल को फिर से खोलकर अनुसंधान (जांच) तेज कर दी है. अब जांच एजेंसी की नजर उन सभी अधिकारियों और व्यक्तियों पर है, जिनकी भूमिका जंगल कटाई प्रकरण में सामने आई है.
सीआईडी अधिकारियों का कहना है कि जांच अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे और भी कार्रवाई की जा सकती है. लंबे समय से चर्चा में रहे इस जंगल कटाई कांड में जांच की रफ्तार बढ़ने से कई लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
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