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Jharkhand News : झारखंड के बड़े स्कूलों व होटलों में फायर सेफ्टी फेल

सबसे गंभीर बात यह है कि फायर सेफ्टी को लेकर सवाल केवल निजी संस्थानों पर ही नहीं उठ रहे हैं. राज्य के पुलिस मुख्यालय में लगे अग्निशमन सिलेंडर कुछ महीनों से एक्सपायरी हो चुके हैं और कई सरकारी भवनों में अग्निशमन उपकरणों की स्थिति संतोषजनक नहीं बताई जा रही है.
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अग्नि शमन मुख्यालय, झारखंड

Ranchi : दिल्ली के एक होटल व बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित अस्पताल में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया. इन हादसों में दो दर्जन से अधिक लोगों की जान चली गई. इसके बावजूद झारखंड ने इन घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया. राज्य कई महत्वपूर्ण संस्थानों-प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी की स्थिति आज भी चिंताजनक है.


राजधानी रांची समेत राज्य के विभिन्न शहरों में संचालित बड़े होटल, निजी अस्पताल, स्कूल, मॉल, अपार्टमेंट व व्यावसायिक भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. कई संस्थानों का फायर एनओसी का समय पर रिन्यूअल नहीं हुआ है, तो कई जगहों पर फायर फाइटिंग सिस्टम केवल दिखावे का बताया जा रहा है.

 

सबसे गंभीर बात यह है कि फायर सेफ्टी को लेकर सवाल केवल निजी संस्थानों पर ही नहीं उठ रहे हैं. कई सरकारी भवनों में अग्निशमन उपकरणों की स्थिति संतोषजनक नहीं बताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में लगे फायर सिस्टम लंबे समय से खराब पड़े हैं या उनकी नियमित जांच नहीं हुई है. ऐसे में आपात स्थिति में ये सिस्टम कितना कारगर होंगे, यह बड़ा प्रश्न है.

 

 

 

राजधानी रांची में कई बड़े होटल, शैक्षणिक संस्थान और बहुमंजिली इमारतें हैं, जहां हर दिन हजारों लोग आते-जाते हैं. लेकिन यदि अचानक आग लग जाए तो क्या वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की पूरी व्यवस्था है? क्या फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और अग्निशमन उपकरण पूरी तरह काम कर रहे हैं? इन सवालों का जवाब तलाशने की जरूरत है.

 

झारखंड सरकार ने सितंबर 2024 में झारखंड फायर सर्विस एक्ट-2024 लागू किया था. इस कानून के तहत अग्निशमन विभाग को नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, भवन सील करने और प्राथमिकी दर्ज करने तक की शक्तियां दी गईं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि कानून लागू होने के करीब 21 महीने बाद भी इसकी नियमावली पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है. यानी कानून तो बन गया, लेकिन उसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया अब भी अधूरी है. नतीजा यह है कि कई मामलों में कार्रवाई की गति धीमी है.

 

सवाल यह है कि क्या झारखंड किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या हर बार जान-माल के नुकसान के बाद ही व्यवस्था जागेगी? अगर समय रहते राज्य के सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, अस्पतालों, होटलों, मॉल और अपार्टमेंट्स का व्यापक फायर ऑडिट नहीं हुआ, तो भविष्य में किसी भी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता.

 

 

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