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Jharkhand News : प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलम्पियाड 31 को, आदिवासी छात्रों को मिलेगा अवसर

Ranchi News : संवाददाता सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि देश भर में 31 अक्टूबर को परीक्षा आयोजित कराए जाएंगे. इस प्रतियोगिता में कक्षा 1 से लेकर 10वीं तक के आदिवासी विद्यार्थी शामिल होंगे. इस ओल्पियाड में शामिल होने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी के 300 रुपये में रजिस्ट्रेशन किए जा रहे है. यह प्रतियोगिता परीक्षा आदिवासी विजडम ट्रस्ट एवं टीम धुमकुड़िया दवारा आयोजिता होगा.
 
संवाददाता सम्मेलन

Ranchi News : आदिवासी विद्यार्थियों को अपनी इतिहास, सभ्यता संस्कृति, परंपरा, आदिवासी ज्ञान और संवैधानिक ज्ञान से जोड़ने के उद्देश्य से पहली बार प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलम्पियाड प्रतियोगी परीक्षा कराए जाएंगे. इसकी तैयारी और उद्देश्य को लेकर प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन सह बैठक आयोजित किए गए. इस दौरान झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि शामिल हुए. 

 

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संवाददाता सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि देश भर में 31 अक्टूबर को परीक्षा आयोजित कराए जाएंगे. इस प्रतियोगिता में कक्षा 1 से लेकर 10वीं तक के आदिवासी विद्यार्थी शामिल होंगे. इस ओल्पियाड में शामिल होने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी के 300 रुपये में रजिस्ट्रेशन किए जा रहे है. यह प्रतियोगिता परीक्षा आदिवासी विजडम ट्रस्ट एवं टीम धुमकुड़िया दवारा आयोजिता होगा.

 

बाहरी प्रभाव से आदिवासी ज्ञान हो रहा है प्रभावित 

इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि आज आदिवासी समाज शिक्षा की ओर आगे बढ़ रही है. देश भर में आदिवासी समाज प्रथम मूलवासी है. इनकी भाषा अनुठी है. लेकिन बाहरी प्रभाव के कारण आदिवासी ज्ञान प्रभावित हो रही है. विश्व में आदिवासी दिवस मना रहे हैं.

 

वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज के आदिवासी ज्ञान सिस्टम में बहुत से चीजे छिपी हुई है. इसी कारण आज मडुवा को विश्वभर में पहचान मिल रही है. आदिवासी समुदाय द्वारा खेती किए जाने वाले साग सब्जी भी औषधि के रूप में उपयोग किए जा रहे है.

 

देश दुनिया के प्रगति के साथ आदिवासी समाज को चलने की जरूरत -डॉ आर्यन भगत

जंगल में पाई जाने वाली विभिन्न जड़ी बुटियां भी दवा के रूप में उपयोग हो रहा है. डॉ. आर्यन भगत ने कहा कि आज भी जनजातीय क्षेत्रों में अपेक्षित विकास नहीं हुआ है. आदिवासी समाज को समय के साथ बदलने की जरूरत है. आदिवासी बच्चों को आदिवासी ज्ञान में परंपरा संस्कृति निहित है. देश दुनिया के प्रगति के साथ आदिवासी समाज को चलना होगा.

 

डॉ सरस्वती गगराई ने कहा कि आदिवासी समाज के बच्चों को अपनी भाषा संस्कृति और सभ्यता में जोडना होगा. आदिवासी समाज की शुरू से आदिवासी समाज की मौखिक साहित्य रही है. इसे बचाने के लिए अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य को जोड़कर रखना होगा.

 

इस मौके पर रणनीति प्रमुख अजय केरकेट्टा, कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रोफेसन डॉ मिनाक्षी मुंडा,लेखक महादेव टोप्पो, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ऑफ एंथ्रोपोलॉजी से डॉ अभय सागर मिंज, समेत सैकड़ो लोग मौजूद रहे.

 

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