Ranchi : झारखंड में लगातार सामने आ रहे दहेज प्रताड़ना और दहेज हत्या के मामलों को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है. राज्य के सभी जिला पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को पत्र भेजकर दहेज निषेध कानून का प्रभावी और कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.
पुलिस मुख्यालय ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के 15 दिसंबर 2025 को दिए गए उस महत्वपूर्ण फैसले के बाद लिया है, जिसमें अदालत ने दहेज प्रथा को समाज की गंभीर बुराई बताते हुए राज्यों को कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया था.
पुलिस मुख्यालय ने सभी एसपी को कहा है कि दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या और विवाहिता की संदिग्ध मौत से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाए. शिकायत मिलने पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने, वैज्ञानिक व निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है.
इधर गृह विभाग ने भी सभी उपायुक्तों (डीसी) को पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करने का आदेश दिया है. जिला प्रशासन को दहेज निषेध अधिकारियों की सक्रियता बढ़ाने, जागरूकता अभियान चलाने और कानून के प्रभावी पालन की निगरानी करने को कहा गया है.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने "स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश बनाम अजमल बेग एवं अन्य" मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि दहेज प्रथा आज भी समाज में गहराई से जड़ जमाए हुए है. अदालत ने स्कूलों और कॉलेजों में दहेज विरोधी जागरूकता बढ़ाने, पुलिस व न्यायिक अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देने और लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था.
झारखंड में बीते कुछ महीनों के दौरान दहेज को लेकर बड़ी संख्या में मामले सामने आए हैं. दहेज हत्या और प्रताड़ना की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. इसी को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने का निर्देश दिया है.
अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग के निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना असर दिखता है और दहेज जैसी सामाजिक कुरीति पर अंकुश लगाने में प्रशासन कितना सफल होता है.
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