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Jharkhand News : हजारीबाग पुलिस पर लगे गंभीर आरोप, बिना FIR किए मांगती है जांच रिपोर्ट

  • सीआईडी जांच में गंभीर आरोपों की पुष्टि के बाद पुलिस का आरोपियों से सांठगांठ का आरोप
  • हजारीबाग सीजीएम अदालत ने मांगी रिपोर्ट

Ranchi : हजारीबाग जिले में अवैध खनन के बाद वन विभाग के अधिकारियों द्वारा अवैध खनन के दोषियों को बचाने के लिए गलत रिपोर्ट बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं. इसकी सीआईडी जांच में भी पुष्टि हुई. इसकी शिकायत मिलने पर भी बड़ा बाजार ओपी पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया.
  

मुख्य आरोपी वन विभाग के रविंद्र नाथ मिश्रा ने अपने अधीनस्थ अधिकारी डीएफओ मौन प्रकाश से अपने खिलाफ आरोपों की जांच रिपोर्ट बड़ा बाजार प्रभारी को दिया. जिसे स्वीकार करते हुए सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने बिना छानबीन किए एक ही दिन में पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट भेज दिया. इस दौरान दिलचस्प तथ्य यह सामने आया है.

 

बड़ा बाजार ओपी प्रभारी यह स्वीकार करते हैं कि आरोपों की जांच के लिए वन विभाग को भेजा गया लेकिन किस पत्र के आलोक में भेजा एवं मुख्य आरोपी ने बड़ा बाजार प्रभारी के किस पत्रांक के जवाब में अपने खिलाफ आरोपों की जांच करवाकर भेजा उसका जिक्र नहीं है. यह सारा घटनाक्रम बिना एफआईआर दर्ज किया गया है.  

 

उपरोक्त मामले को लेकर बड़कागांव निवासी एवं पर्यावरण कार्यकर्ता शनि कांत उर्फ मंटू सोनी ने हजारीबाग पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए हजारीबाग सीजीएम में परिवाद वाद संख्या 1018/2016 दर्ज कर पुलिस अधिकारियों पर न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने और झूठी रिपोर्ट भेजने का गंभीर आरोप लगाया है.

 

शिकायत में हजारीबाग वन विभाग के अधिकारी रवींद्र नाथ,  डीएफओ पश्चिमी मौन प्रकाश, पूर्व पीसीसीएफ अशोक कुमार सहित 7 लोगों को आरोपी बनाया गया है. अधिवक्ता पवन कुमार यादव और प्रवीण प्रकाश द्वारा कोर्ट में पक्ष रखने के बाद अदालत ने हजारीबाग पुलिस से रिपोर्ट मांगा है. 

 

शिकायतकर्ता शनि कांत उर्फ मंटू सोनी ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के तत्कालीन अधिकारियों द्वारा FOREST CLEARANCE (FC) शर्तों का उल्लंघन कर लगभग 156 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध खनन कराया गया, जिसमें क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली नदी भी प्रभावित हुई. इस मामले की पुष्टि अपराध अनुसंधान विभाग (CID) झारखंड की रिपोर्ट में भी की जा चुकी है.

 

शनि कांत ने बताया कि उन्होंने 10 नवंबर 2025 को बड़ा बाजार ओपी प्रभारी को स्पीड पोस्ट के माध्यम से FIR दर्ज करने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया. उनका आरोप है कि जब उन्होंने “जीरो FIR” दर्ज करने का आग्रह किया, तब भी पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की.

 

इसके बाद उन्होंने 17 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय के CPGRAMS पोर्टल पर शिकायत संख्या MINHA/E/2026/0002397 दर्ज कराई. साथ ही 5 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली में भी शिकायत दायर की, जिसे DIARY No. NHRC as 43714/CR/2026 के तहत दर्ज किया गया.

 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बड़ा बाजार ओपी प्रभारी पंकज कुमार एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) सदर, हजारीबाग ने तथ्यों को छुपाते हुए “भ्रामक एवं पूर्वाग्रहग्रस्त” प्रतिवेदन वरीय अधिकारियों को भेजा. उन्होंने कहा कि पुलिस ने आवेदन के महत्वपूर्ण अनुलग्नकों को नजरअंदाज कर तकनीकी बहाने बनाकर FIR दर्ज नहीं की.

 

शनि कांत ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने जांच के लिए उसी वन विभाग कार्यालय से रिपोर्ट मांगी, जिसके अधिकारी स्वयं मामले में आरोपी हैं. उन्होंने इसे “नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन” बताते हुए कहा कि आरोपी व्यक्ति अपनी ही जांच का निर्णायक नहीं हो सकता.

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