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झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से जाता है देश का 75 फीसदी कोयला, इसपर ही केंद्र की नजर- सुप्रियो

  • देश में सिर्फ रांची का ED दफ्तर ही सक्रिय, भाजपा ने ईडी का अर्थ इंड ऑफ डेमोक्रेसी कर दिया
  • इसलिए तीनों राज्यों को अस्थिर और झारखंड को नेस्तनाबूत करना चाहती है भाजपा
  • हीरा भगत बीजेपी MLC के हैं समधी, लेकिन हेमंत सोरेन का नाम उछालकर सेट किया जा रहा नैरिटिव
Ranchi: साहिबंगज में जिस हीरा भगत के ठिकाने से करोड़ों रुपये बरामद हुए हैं वह कोहिनूर भाजपा के हैं. हीरा भगत किशनगंज के एमएलसी दिलीप जायसवाल के समधी हैं. सवाल ये है कि ED की छापेमारी के बाद आखिर भाजपा एमएलसी दिलीप जायसवाल का नाम सामने क्यों नहीं आया. सीएम हेमंत सोरेन का ही नाम क्यों उछाला गया. दरअसल, यह भाजपा की साजिश है हेमंत सरकार के खिलाफ नैरेटिव सेट करने की. जेएमएम के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए यह बातें कही. इसे पढ़ें-जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-protest-at-the-central-water-tower-gate-of-jusco-in-protest-against-the-complicated-process-of-water-connection-in-the-eastern-area/">जमशेदपुर

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उन्होंने कहा असल मामला यह है कि देश का 75 फीसदी कोयला झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से जाता है और इन चारों राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है. इसी छटपटाहट में यह कुचक्र रचे जा रहे हैं. पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़,  ओडिशा को अस्थिर करना और झारखंड को नेस्तनाबूत करना ही भाजपा का एकमात्र लक्ष्य है. इसके लिए ईडी का सहारा लिया जा रहा है. अभी देश में सिर्फ रांची का ईडी दफ्तर ही खुला है. बाकी बंद हैं. भाजपा ने ईडी का अर्थ इंड ऑफ डेमोक्रेसी कर दिया है. सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बार-बार किसी जांच प्रक्रिया को सीधे राज्य के साथ जोड़ना यह राज्य को बदनाम करने की साजिश है. मनरेगा घोटाला अर्जुन मुंडा के कार्यकाल का है. घोटाले में पूजा सिंघल को रघुवर सरकार में क्लीन चिट दी गई और मामला हेमंत सरकार के कार्यकाल में पकड़ा गया. इसे हेमंत सोरेन से जोड़कर देखा जा रहा है. मतलब आज भी राज्य में उपनिवेशवादी और सामंतवादी सोच वाले लोग हैं जो नहीं चाहते आदिवासी-मूलवासी मूलवासी की सरकार बने. इसे भी पढ़ें-रिम्स">https://lagatar.in/rims-one-days-salary-will-be-deducted-if-there-is-no-satisfactory-answer-from-the-doctors-found-missing-from-duty/">रिम्स

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उन्होंने कहा कि इस बात की भी जांच हो कि 2014 से 2019 तक साहिबगंज में कितने लोगों को स्टोन माइनिंग लीज का पट्टा मिला और कितनों को क्रशर का लाइसेंस. सबका नाम और उनके राजनीतिक कनेक्शन भी सामने आने चाहिए. [wpse_comments_template]  

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