Ranchi : झारखंड पुलिस में कई आईपीएस अधिकारी वर्षों की सेवा के बावजूद आज तक किसी जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) नहीं बन सके हैं. कई अधिकारी जिला कप्तानी का इंतजार करते-करते सेवानिवृत्त हो गए, जबकि कुछ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए. वहीं, कई अधिकारियों को पूरे सेवा काल में केवल एक बार ही कुछ महीने के लिए जिले की कमान संभालने का अवसर मिला.
'महकमे के गलियारों में एक जुमला अक्सर सुनाई देता है, हर वर्दी को उसका मैदान नसीब नहीं होता'
महकमे के भीतर यह माना जा रहा है कि जिला कप्तानी के अवसर सभी अधिकारियों को समान रूप से नहीं मिले. के. विजय शंकर और विनीत फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. वहीं, संध्या रानी मेहता, संजय रंजन, चंद्रशेखर प्रसाद सहित कई आईपीएस अधिकारी अब भी जिला कप्तानी के मुन्तजिर रहे.
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2017 से 2020 बैच के कई आईपीएस अधिकारियों को आज तक पहली बार किसी जिले की कमान नहीं मिली है. वहीं, आईपीएस ऋषभ झा को केवल एक बार जिले का पुलिस अधीक्षक बनाया गया. इसके बाद उनकी तैनाती पुलिस मुख्यालय में कर दी गई और तब से उन्हें दोबारा किसी जिले की जिम्मेदारी नहीं मिली. ऐसे कई अधिकारी हैं, जिन्हें पूरे सेवा काल में सिर्फ एक बार जिला कप्तानी का अवसर मिला, जबकि कई अधिकारी वर्षों से मुख्यालय और अन्य इकाइयों में ही तैनात हैं.
जिला कप्तानी किसी भी आईपीएस अधिकारी के करियर का सबसे अहम मुकाम मानी जाती है. ऐसे में योग्य अधिकारियों का वर्षों तक फील्ड पोस्टिंग से महरूम रहना महकमे में कई तरह के सवाल और असंतोष को जन्म दे रहा है.
अब पुलिस महकमे और राज्य सरकार की अगली तबादला सूची पर नजरें टिकी हैं. देखने वाली बात होगी कि लंबे समय से जिला कप्तानी के मुन्तजिर अधिकारियों की मुराद पूरी होती है या पोस्टिंग का मौजूदा निजाम पहले की तरह ही कायम रहता है.
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