Ranchi : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा है कि दावोस में भारत के पांच मुख्यमंत्री अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. जहां एक ओर महाराष्ट्र सरकार ने दावोस में लगभग 14 से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए, वहीं तेलंगाना सरकार ने करीब 29,000 करोड़ रुपये के ठोस निवेश करार किए, जिनमें डेटा सेंटर, एआई, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर शामिल हैं.
अन्य राज्यों ने भी हजारों करोड़ के ठोस निवेश के वायदे प्राप्त किया. दूसरी ओर, झारखंड के हिस्से में एक भी नया बड़ा निवेश समझौता नहीं आया. दावोस में जिस टाटा स्टील के साथ पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन समझौते को झारखंड सरकार उपलब्धि बताने की कोशिश कर रही है, वह कोई नया निवेश नहीं बल्कि पहले से स्वीकृत और घोषित परियोजनाओं की री-पैकेजिंग मात्र है.
दावोस में किसी नई यूनिट की घोषणा नहीं
झारखंड में टाटा स्टील का अधिकांश बड़ा निवेश पहले ही मंजूर और घोषित है. जमशेदपुर प्लांट का आधुनिकीकरण, खनन लीज और कैप्टिव माइंस, पूर्व में स्वीकृत विस्तार योजनाएं.
प्रतुल ने कहा कि दावोस में न तो किसी नई यूनिट की घोषणा हुई, न नई स्टील प्लांट क्षमता की, न किसी नई लोकेशन की जानकारी दी गई. एमओयू की राशि, समय-सीमा और संभावित रोजगार के आंकड़े तक सार्वजनिक नहीं किए गए, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है.
यह साफ दिखाता है कि झारखंड सरकार के पास दावोस में दिखाने के लिए नया विज़न नहीं, केवल पुरानी फाइलें और फोटो-ऑप थे. झारखंड को विकास चाहिए,पर्यटन राजनीति नहीं.
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