- जांच पूरी होने से पहले करोड़ों के भुगतान का दावा
Ranchi: झारखंड कृषि निदेशालय में कथित अनियमितता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव सह राज्य कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार सिंह ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के उप आयुक्त योगेश ए. रौंडल को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कृषि निदेशालय ने वर्ष 2023 में गंभीर अनियमितताओं के आरोप में 14 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया था. बाद में इन कंपनियों को 30 दिनों के भीतर तार्किक आदेश जारी कर सूची से बाहर कर दिया गया था. इसके बाद उन्हें दोबारा काम सौंपे जाने और करोड़ों रुपये के भुगतान का भी आरोप लगाया गया है.
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शिकायतकर्ता के अनुसार, कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से बाहर करने के दौरान एक अहम शर्त रखी गई थी. संबंधित कंपनियों को किसानों के खेतों में लगाए गए कथित खराब गुणवत्ता वाले उपकरणों के बैच बदलने थे. इसके बाद उपकरणों की दोबारा सीपेट से जांच कराकर रिपोर्ट कृषि निदेशक को सौंपनी थी. आरोप है कि यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई.
शिकायत में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन कृषि निदेशक ताराचंद ने 18 मार्च 2024 को आदेश जारी कर जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित कार्यादेश को शिथिल रखने का निर्देश दिया था. साथ ही हजारीबाग उपायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की बात कही गई थी. आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित कंपनियों को दोबारा काम मिला और भुगतान भी कर दिया गया.
शिकायत में जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उनमें मोहित इंडिया, मेक नाउ इंडस्ट्रीज, ग्लोबल मैकेनिकल इक्विपमेंट, प्रीमियर इरिगेशन एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड, निंबस पाइप्स लिमिटेड, मोहित पॉलिटेक प्राइवेट लिमिटेड, वेदांता पॉलिमर्स प्राइवेट लिमिटेड, रूंगटा इरिगेशन लिमिटेड, श्री भंडारी प्लास्टिक प्राइवेट लिमिटेड, भारत ड्रिप इरिगेशन एंड एग्रो, आरएम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर सिस्टम लिमिटेड, समय इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड, दिनेश इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड और इरिलिंक ड्रिप इरिगेशन इंडस्ट्रीज शामिल हैं.
अजय कुमार सिंह ने केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने संबंधित कंपनियों के कार्यादेश और भुगतान पर रोक लगाने, पूरे मामले की एसआईटी से जांच कराने तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत दिए गए सरकारी अनुदान की भी जांच और आवश्यकता पड़ने पर वसूली की मांग की है.
उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है. हालांकि, लगाए गए आरोपों पर कृषि निदेशालय या संबंधित कंपनियों का पक्ष उपलब्ध नहीं है.
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