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नहीं रहीं झारखंड की प्रख्यात आदिवासी लेखिका, कवयित्री व सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रोज केरकेट्टा

 
Ranchi: प्रख्यात आदिवासी लेखिका, कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रोज केरकेट्टा का गुरुवार को निधन हो गया. उनकी लेखनी ने झारखंड की सामाजिक सच्चाइयों और जनविमर्श को नई दिशा देने का काम किया. डॉ. केरकेट्टा का जन्म 5 दिसंबर 1940 को सिमडेगा जिले के कइसरा सुंदरा टोली गांव में खड़िया आदिवासी समुदाय में हुआ था. उन्होंने हिंदी साहित्य में एमए और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की. डॉ. केरकेट्टा का अंतिम संस्कार शुक्रवार, 18 अप्रैल को GEL चर्च कब्रगाह, सिरमटोली, रांची में किया जाएगा. इसे भी पढ़ें -1st">https://lagatar.in/1st-jpsc-scam-six-accused-surrender-in-cbi-court-fill-bail-bond/">1st

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कई संस्थाओं से थीं जुड़ी डॉ. केरकेट्टा ने अपने जीवनकाल में शिक्षा, सामाजिक विकास, मानवाधिकार और आदिवासी महिलाओं के उत्थान के लिए काम किया. वे झारखंड नेशनल एलायंस ऑफ वीमेन और प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन जैसी संस्थाओं से जुड़ी थीं. साहित्यिक योगदान डॉ. केरकेट्टा की रचनाएं आदिवासी संवेदना, सामाजिक न्याय और स्त्री विमर्श की सशक्त अभिव्यक्ति हैं. उनकी प्रमुख पुस्तकों में ये शामिल हैं - पगहा जोरी-जोरी रे घाटो: एक हिंदी कहानी संग्रह जो स्त्री मन की जटिलताओं को उजागर करता है. - सिंकोय सुलोओ: एक खड़िया कहानी संग्रह. - हेपड़ अवकडिञ बेर: एक खड़िया कविता और लोक कथा संग्रह. इसे भी पढ़ें -तीसरे">https://lagatar.in/robert-vadra-appeared-before-ed-on-the-third-day-called-it-a-political-witch-hunt-by-bjp/">तीसरे

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