Ranchi: हरमू स्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने प्रस्तावित 121वें संविधान संशोधन और महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए.
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि 19वीं लोकसभा के बजट सत्र के विस्तारित सत्र में लाया जाने वाला 121वां संविधान संशोधन एक भयंकर साजिश की शुरुआत है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिसंबर 2023 में महिला आरक्षण कानून पहले ही पारित हो चुका है, तो फिर नए संशोधन की जरूरत क्यों पड़ रही है.
उन्होंने महिला आरक्षण लागू करने में देरी को लेकर भी सरकार को घेरा. उनका कहना था कि विपक्ष ने 2024 के चुनाव में ही इसे लागू करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने जनगणना और परिसीमन का हवाला देकर इसे 2029 तक टाल दिया. उन्होंने कहा कि अब तक जनगणना की कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है.
भट्टाचार्य ने जातीय जनगणना को जरूरी बताते हुए कहा कि जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि देश में विभिन्न वर्गों की वास्तविक संख्या कितनी है, तब तक सीटों का सही बंटवारा संभव नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सही आंकड़ों के परिसीमन करना संविधान की भावना के खिलाफ है.
उन्होंने केंद्र सरकार पर क्षेत्रीय असंतुलन पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन राज्यों में सत्ता पक्ष मजबूत है, वहां सीटें बढ़ाने की कोशिश हो रही है, जबकि झारखंड और दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम किया जा सकता है. उन्होंने इसे संसद में कानूनी तरीके से हस्तक्षेप करार दिया.
परिसीमन आयोग को लेकर भी उन्होंने आशंका जताई कि यह निष्पक्ष तरीके से काम नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि बूथ स्तर तक छेड़छाड़ की आशंका है और राजनीतिक लाभ के अनुसार क्षेत्रों का विभाजन किया जा सकता है.
सुप्रियो भट्टाचार्य ने एनडीए के सहयोगी दलों से अपील करते हुए कहा कि चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि वे अपने राज्यों के हित में हैं तो सरकार से समर्थन वापस लेने पर विचार करें.
उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इस मुद्दे को लेकर सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन करेगा. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 18 से 20 तारीख तक पश्चिम बंगाल दौरे पर रहेंगे और वहां चुनाव प्रचार में हिस्सा लेंगे.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उन्होंने कहा कि जिस तरह से संविधान और लोकतंत्र के साथ छेड़छाड़ हो रही है, वह देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए गंभीर खतरा है.
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