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चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर झामुमो ने उठाए सवाल, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

Ranchi News: विनोद पांडेय ने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था है. इसे किसी एक व्यक्ति के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई.
 
विनोद पांडेय (फाइल फोटो)

Ranchi News: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है.

 

विनोद पांडेय ने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था है. इसे किसी एक व्यक्ति के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई. उनका कहना है कि अगर दो चुनाव आयुक्त बार-बार आपत्ति दर्ज कर रहे हैं, तो यह गंभीर सवाल है कि आयोग के फैसले किस तरह लिए जा रहे थे.

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उन्होंने कहा कि यह केवल सामान्य प्रशासनिक मतभेद का मामला नहीं है. इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और उसकी विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठते हैं. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाब मांगा कि दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर क्या कार्रवाई की गई और उनकी जानकारी के बिना फैसले कैसे लिए गए.

 

विनोद पांडेय ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. ज्ञानेश कुमार की मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति के समय झामुमो समेत कई विपक्षी दलों और कानून के जानकारों ने सवाल उठाए थे.

 

उन्होंने SIR यानी Special Intensive Revision की प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई. पांडेय ने कहा कि मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव, सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने में कथित तकनीकी दिक्कतों के मामले गंभीर हैं. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची किसी सरकार की कृपा नहीं है, बल्कि नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार का आधार है. किसी भी पात्र नागरिक को वोट देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.

 

झामुमो नेता ने कहा कि पार्टी शुरू से SIR के खिलाफ नहीं, बल्कि इसकी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है. उन्होंने महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर उठे सवालों का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि इन राज्यों में SIR के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए और इसका राजनीतिक असर पड़ा.

 

विनोद पांडेय ने सवाल किया कि 10 महीने में 14 आपत्तियां क्यों दर्ज हुईं? क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इन आपत्तियों की जानकारी थी? अगर जानकारी थी तो इस पर क्या कार्रवाई हुई?

 

उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखना लोकतंत्र के लिए जरूरी है. पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की. साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को किसी एक व्यक्ति के फैसलों पर चलने वाली संस्था नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई.

 

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