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झामुमो ने PM के संबोधन पर साधा निशाना, महिला आरक्षण व परिसीमन पर उठाए सवाल

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने हरमू स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन और उनके हालिया बयानों पर तीखा हमला बोला.
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Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने हरमू स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन और उनके हालिया बयानों पर तीखा हमला बोला.

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे पहले उन्होंने झारखंड-वासियों को अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं देते हुए सभी के स्वास्थ्य, समृद्धि और प्रगति की कामना की. इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि 1947 के बाद से यह राष्ट्र के नाम लगभग 80वां संबोधन था. उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसे संबोधन युद्ध, महामारी या स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर देश को भरोसा देने के लिए होते हैं, लेकिन इस बार इसे राजनीतिक मंच बना दिया गया.

 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि करीब 29 मिनट के इस संबोधन में प्रधानमंत्री चार तिरंगों के सामने खड़े होकर देश के पुराने और क्षेत्रीय दलों जैसे कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके पर हमला कर रहे थे. उन्होंने इसे जघन्य और लज्जास्पद राजनीतिक वक्तव्य बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के सामने प्रधानमंत्री को भाजपा नेता की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए था.

 

महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सितंबर 2023 में 106वां संविधान संशोधन पारित हो चुका है, जिसमें महिला आरक्षण का प्रावधान सुरक्षित है. इसके बावजूद सरकार इसे लागू नहीं कर रही है और 2027 की जनगणना तथा उसके बाद होने वाले परिसीमन से जोड़कर 2029 तक टाल दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस तरह महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय हो रहा है.

 

परिसीमन आयोग के ढांचे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पहले परिसीमन आयोग में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और सामाजिक विशेषज्ञों सहित करीब 50 सदस्य होते थे. लेकिन अब इसे घटाकर तीन सदस्यीय बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसमें हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज और चुनाव आयुक्त शामिल होंगे. उनका कहना था कि ऐसे सदस्यों को स्थानीय जनसंख्या और भौगोलिक परिस्थितियों की पूरी समझ नहीं होगी.

 

प्रधानमंत्री के बांकुड़ा रैली के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने आदिवासी अस्मिता का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाए जाने की बात कही जाती है, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने के दौरान प्रधानमंत्री खुद बैठे रहे और राष्ट्रपति खड़ी रहीं, जो उनके सम्मान के खिलाफ था.

 

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब द्रौपदी मुर्मू झारखंड की राज्यपाल थीं, तब उन्होंने रघुवर दास सरकार द्वारा लाए गए सीएनटी और एसपीटी एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव को खारिज कर आदिवासी हितों की रक्षा की थी.

 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने मांग की कि जब महिला आरक्षण लागू किया जाए, तो उसमें ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण भी शामिल किया जाए.

 

अंत में उन्होंने भाजपा पर मनुवादी सोच और उग्र हिंदुत्व के जरिए समाज को बांटने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अगर संविधान और देश की सामाजिक संरचना के साथ छेड़छाड़ की गई, तो पूरा विपक्ष मिलकर इसका विरोध करेगा और ऐसे प्रयासों को विफल कर देगा.

 

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