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असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स और जिला प्रशासन के साझा कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा- जलवायु कार्य योजना तैयार कर लागू करने की जरूरत

Motihari  : गुरुवार को असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स और जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम “जलवायु से सुरक्षित पूर्वी चंपारण के लिए जल-जीवन-हरियाली मिशन जरुरी” में जलवायु विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी. विशेषज्ञों जलवायु संकट से निपटने के लिए जिला जलवायु कार्य योजना तैयार और इसे लागू करने को जरूरी बताया. कार्यक्रम में जलवायु और सार्वजनिक नीति विश्लेषक गोपाल कृष्ण ने स्थानीय हितधारकों की मदद करने के लिए जिला-स्तरीय जलवायु कार्य योजना तैयार करने और अधिकारियों द्वारा समस्याओं को कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, कि ‘बिहार सबसे संवेदनशील राज्यों में से एक है, जो एक साथ बाढ़ और सूखे का सामना करता है. हमें जलवायु संकट की चुनौती से निपटने के लिए जिला स्तरीय रणनीति की जरूरत है.’ इसे भी पढ़ें : बिहार">https://lagatar.in/man-eating-tiger-kills-farmer-anger-among-people-2/">बिहार

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उद्घाटन भाषण में, डीपीआरओ सादिक अख्तर ने महत्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली मिशन की उपलब्धियों के बारे में एक-एक कर बताया, जो जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भूजल स्तर को फिर से पूर्व की स्थिति में लाने में मदद कर रहा है. उन्होंने कहा कि ‘जल-जीवन-हरियाली मिशन जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को कम करने की दिशा में प्रभावी कार्यक्रम साबित हो सकता है और समाज को प्रकृति की ओर लौटने के लिए प्रेरित कर सकता है.’ डीआरडीए की निदेशक मेघा कश्यप ने कहा कि पूर्वी चंपारण ने जल-जीवन हरियाली मिशन के लिए नया मानदंड स्थापित किया है और जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक के नेतृत्व में इस मिशन के तहत जिलेभर में लाखों पेड़ लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि ‘चंपारण के संरक्षक कार्यक्रम के तहत पीपल, बरगद, नीम आदि के लगभग 12,000 वृक्षों, जो 100 साल से अधिक पुराने हैं, की उनके संरक्षण और देखभाल के लिए पहचान की गई है. पुराने पेड़ों का स्वामित्व एक मोबाइल ऐप के माध्यम से अलग-अलग व्यक्तियों को हस्तांतरित किया जा रहा है.’ उन्होंने आगे कहा कि जिले में कोई भी चापाकल जलस्तर कम होने के कारण बंद नहीं पड़ा है, जो अच्छी खबर है. मनरेगा के डीपीओ अमित कुमार ने मनरेगा से संबंधित जिले की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए कहा कि मनरेगा के तहत चलाए जा रहे प्रत्येक ग्राम एक तालाब योजना के तहत 300 से अधिक तालाबों का कायाकल्प या निर्माण किया गया है, जिससे जल संरक्षण और अंततः जिले के मौजूदा भूजल स्तर को उंचा करने में मदद मिली है. इस अवसर पर वरिष्ठ उप समाहर्ता मोनू कुमार एवं जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक गणेश पासवान ने भी अपने विचार रखे. असर के प्रतिनिधि मुन्ना कुमार झा ने कहा, ‘जल-जीवन-हरियाली मिशन देश में जलवायु संकट से लड़ने के लिए शुरू किए गए बहुत अहम उपायों में से एक है. बिहार की कृषि और जल प्रणालियों को जलवायु के खतरों से सुरक्षित करने के लिए यह जरूरी है कि यह योजना ताल-मेल के साथ कार्यान्वित की जाए.’ पर्यावरण संरक्षण में शामिल अधिकारियों ने इस कार्यक्रम में जलवायु संकट की चुनौतियों से लड़ने के अपने संकल्प को दोहराया. यह कार्यक्रम आजीविका को जलवायु परिवर्तन से अप्रभावित बनाने हेतु शुरू किए गए संवाद का हिस्सा है. कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पंचायती राज अधिकारी सादिक अख्तर और जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण (डीआरडीए) के निदेशक मेघा कश्यप ने किया. इस कार्यक्रम में जीविका दीदी और शिक्षाविदों के साथ-साथ कई प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) और अंचल अधिकारी शामिल हुए. इसे भी पढ़ें : आदमखोर">https://lagatar.in/man-eating-tiger-kills-farmer-anger-among-people/">आदमखोर

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