Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

JPSC-JSSC Protest: तीन दौर की वार्ता के बाद भी नहीं माने छात्र, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव पर अड़े छात्र

JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों और सरकार के बीच लगातार तीन दौर की वार्ता के बाद भी गतिरोध खत्म नहीं हो सका. सरकार की ओर से कई मांगों पर उदार रुख अपनाते हुए छात्रों से 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव और आंदोलन को स्थगित करने की अपील की गई
Advertisement
Advertisement
  • सरकार ने कहा- बातचीत का रास्ता अभी खुला

Ranchi: JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों और सरकार के बीच लगातार तीन दौर की वार्ता के बाद भी गतिरोध खत्म नहीं हो सका. सरकार की ओर से कई मांगों पर उदार रुख अपनाते हुए छात्रों से 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव और आंदोलन को स्थगित करने की अपील की गई, लेकिन छात्र अपनी प्रमुख मांगों को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हुए.

 

तीनों दौर की वार्ता में मुख्य रूप से परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच, प्रभावित परीक्षाओं को रद्द करने, दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए परीक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. वार्ता में JPSC की 14वीं परीक्षा के साथ बैकलॉग और रेगुलर परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई.

 

इसे भी पढ़ें:

 

सरकार की ओर से बताया गया कि 14वीं JPSC परीक्षा में TDPL से संबंधित कथित गड़बड़ी की जांच CID करेगी. मामले में संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात भी सामने आई है. सरकार ने ED से भी मामले की जांच कराने के लिए अनुरोध भेजने की बात कही. साथ ही JPSC के सदस्यों के इस्तीफे का मुद्दा भी वार्ता में सामने आया.

 

सरकार ने JPSC की बैकलॉग और 14वीं JPSC की रेगुलर परीक्षाओं से जुड़े मामलों की भी जांच कराने की बात कही. TDPL की भूमिका और उससे संबंधित पूरी प्रक्रिया की जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया गया.

 

CGL पर अटका मामला

शुरुआत में बातचीत का केंद्र मुख्य रूप से JPSC की परीक्षाएं थीं, लेकिन बाद में छात्र प्रतिनिधियों ने JSSC CGL का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. छात्रों की मांगों और सरकार के प्रस्ताव के बीच सबसे बड़ा गतिरोध इसी मुद्दे पर बना हुआ है.

 

सरकार की ओर से कहा गया कि JSSC CGL से संबंधित मामला फिलहाल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. ऐसे में सरकार के लिए सीधे परीक्षा रद्द करने का निर्णय लेना संभव नहीं है. हालांकि, मामले की समीक्षा के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का विकल्प सरकार ने छात्रों के सामने रखा. बताया गया कि कमेटी करीब 90 दिनों में अपनी रिपोर्ट दे सकती है.

 

जांच और समीक्षा प्रक्रिया में IIT-ISM, XLRI सहित अन्य विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने की भी बात सरकार की ओर से कही गई. इसके अलावा एक पोर्टल बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया, जहां अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं और अपने सुझाव दर्ज करा सकेंगे.

 

CBI जांच पर सरकार का तर्क

छात्रों की ओर से लगातार CBI जांच की मांग उठाए जाने के सवाल पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रेस वार्ता में सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि इससे पहले JPSC की पहली और दूसरी परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच भी CBI को दी गई थी, लेकिन 20 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उसका अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया है.

 

सरकार का तर्क है कि केवल CBI जांच की मांग करने के बजाय ऐसी जांच व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें मामले की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. इसी संदर्भ में सरकार ने रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी और विशेषज्ञ संस्थानों की सहायता से जांच कराने का विकल्प रखा है.

 

हालांकि, छात्रों ने CGL को लेकर सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

 

10 अगस्त के विधानसभा घेराव पर अड़े छात्र

तीन दौर की वार्ता के बावजूद छात्र 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को स्थगित करने के लिए तैयार नहीं हुए हैं. सरकार की ओर से मीडिया के माध्यम से छात्रों और उनके अभिभावकों से आंदोलन की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की गई है.

 

सरकार ने कहा कि अभी भी बातचीत का रास्ता खुला है और छात्रों की मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार ने छात्रों से 10 अगस्त के प्रस्तावित प्रदर्शन को रद्द करने की अपील करते हुए कहा कि 14वीं JPSC परीक्षा में TDPL से संबंधित जो भी गड़बड़ी हुई है, उसके लिए जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी होगी.

 

सरकार ने जांच के माध्यम से दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है. हालांकि, छात्रों और सरकार के बीच खासकर JSSC CGL को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण आंदोलन का गतिरोध बरकरार है.


JSSC परीक्षाओं में ये सुधार लाए जाएंगे

50 हजार से अधिक अभ्यर्थी होने पर दो स्तरों में परीक्षा: JSSC CGL जैसी परीक्षाओं में यदि अभ्यर्थियों की संख्या 50,000 से अधिक होती है, तो परीक्षा PT (प्रारंभिक परीक्षा) और Mains के दो चरणों में आयोजित की जाएगी.

 

Mains में 15 गुना अभ्यर्थी: प्रारंभिक परीक्षा के बाद उपलब्ध पदों की संख्या के 15 गुना अभ्यर्थियों को Mains के लिए चयनित किया जाएगा.

 

CBT मोड पर Mains परीक्षा: Mains परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने पर जोर रहेगा. इससे प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना नही होती है.

 

PT के लिए नई रणनीति: प्रारंभिक परीक्षा को भी अधिक सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए नई व्यवस्था/रणनीति तैयार की जाएगी.

 

परिणाम में अधिक पारदर्शिता: अभी अभ्यर्थी अपने लॉगिन के जरिए मुख्य रूप से अपना परिणाम देख पाते हैं. प्रस्तावित व्यवस्था में यह जानकारी भी उपलब्ध कराने पर जोर है कि किस अभ्यर्थी को कितने अंक मिले और किन अभ्यर्थियों को किस कारण से रिजेक्ट किया गया.

 

परीक्षा केंद्रों पर बेहतर व्यवस्था: परीक्षा केंद्र के बाहर शिकायत/ग्रिवांस की व्यवस्था, पेयजल समेत अभ्यर्थियों की अन्य जरूरी सुविधाओं को सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही